सीवान में रक्षाबंधन पर सुधा दीदी का संदेश, कहा-मन को नकारात्मकता से बचाना ही सच्ची रक्षा

Siwan Raksha Bandhan Program : सीवान में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ने रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया. राजयोगिनी सुधा दीदी ने बताया कि यह पर्व आत्म-स्मृति, पवित्र संकल्प और मन की सुरक्षा का प्रतीक है.

Siwan Raksha Bandhan Program : सीवान के मखदूम सराय स्थित परमात्म दर्शन भवन में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की स्थानीय शाखा की ओर से रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में नगर के गणमान्य नागरिकों, वरिष्ठ चिकित्सकों, विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों और करीब 200 भाई-बहनों ने भाग लिया.

सुधा दीदी ने बताया तिलक और मिठाई का आध्यात्मिक अर्थ

कार्यक्रम में राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सुधा दीदी ने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि मस्तक पर लगाया जाने वाला तिलक आत्म-स्मृति का प्रतीक है और यह भृकुटी के मध्य स्थित चेतन दिव्य आत्मा का स्मरण कराता है. वहीं मुख मीठा कराने के पीछे हमेशा मधुर वचन बोलने और व्यवहार में कठोरता नहीं रखने का भाव है.

सिर्फ धागा नहीं, पवित्र संकल्प का पर्व है रक्षाबंधन

सुधा दीदी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल धागा बांधने का उत्सव नहीं है. यह आत्मा को श्रेष्ठता और पवित्रता के सूत्र में बांधने का पर्व है. सच्ची सुरक्षा बाहरी संकटों से बचने के साथ मन को नकारात्मक विचारों, बुद्धि के भ्रम और कमजोर संस्कारों से बचाने में भी है.

शांत मन से मिलती है आंतरिक शक्ति

उन्होंने कहा कि जब मन शांत होता है और संकल्प श्रेष्ठ होते हैं, तब व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को सुरक्षित और शक्तिशाली महसूस करता है. आत्मिक चेतना में रहकर कर्म करने से जीवन में स्थिरता और संतुष्टि बढ़ती है.

आत्मा का मूल स्वरूप शांति और पवित्रता

सुधा दीदी ने आध्यात्मिक दृष्टिकोण समझाते हुए कहा कि मनुष्य शरीर नहीं, बल्कि आत्मा है. आत्मा का मूल स्वरूप शांति, प्रेम, सुख, पवित्रता और शक्ति है. जब आत्मा परमात्मा से जुड़ती है तो व्यक्ति को भीतर से नई ऊर्जा और सही दिशा मिलती है.

रक्षा सूत्र से श्रेष्ठ विचारों का संकल्प

उन्होंने कहा कि रक्षा सूत्र व्यक्ति को यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि विचार पवित्र रहें, वाणी मधुर हो और व्यवहार श्रेष्ठ हो. जीवन ऐसा होना चाहिए कि व्यक्ति की उपस्थिति से दूसरों को शांति और सुरक्षा का अनुभव हो.

व्यक्ति के बदलाव से समाज में आता है परिवर्तन

सुधा दीदी ने कहा कि व्यक्ति के स्वयं बदलने से परिवार में सकारात्मक बदलाव आता है और परिवार के बदलने से समाज में भी परिवर्तन होता है. इसलिए रक्षाबंधन का संदेश केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जीवन को भी बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है.

बाहरी उपलब्धियों के बावजूद मन में असुरक्षा

उन्होंने कहा कि आज बाहरी उपलब्धियां बढ़ने के बावजूद कई लोग भीतर से असुरक्षित महसूस करते हैं. ऐसे समय में रक्षाबंधन भीतर की शक्ति जगाने, रिश्तों को पवित्र बनाने और जीवन को मूल्यवान बनाने का संदेश देता है.

जीवन को आत्मिक शक्ति से जोड़ने का आह्वान

सुधा दीदी ने लोगों से आह्वान किया कि इस रक्षाबंधन केवल धागा बांधने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने जीवन को आत्मिक शक्ति, पवित्रता और ईश्वरीय स्मृति से जोड़ने का संकल्प लें. उन्होंने इसे सच्ची रक्षा, आत्मविश्वास और जीवन की वास्तविक विजय का मार्ग बताया.

बीके रिंकी बहन ने किया कार्यक्रम का संचालन

कार्यक्रम का संचालन बीके रिंकी बहन ने किया. इस अवसर पर डॉ. आशुतोष कुमार सिन्हा, डॉ. पीके गिरि, डॉ. जेएन प्रसाद, डॉ. विनय भूषण सिंह, प्रेम भाई, निर्मल भाई, सुभाष भाई, रविंद्र भाई समेत अन्य लोग मौजूद रहे.

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By अमरनाथ शर्मा

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