बारिश थमी, रबी की बुआई पर संकट

मोंथा तूफान ने जिला के किसानों के समक्ष बड़ी समस्या खड़ा कर दिया है. आमतौर पर अक्टूबर माह में बारिश नहीं होती है. लेकिन इस बार की बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर को तोड़ दिया है. खेत में धान की फसल तैयार हो गयी है. जबकि खेतों में पानी लगा हुआ है. इससे धान की फसल खेतों में ही सड़ रही है. वहीं दूसरी ओर रबी की बुआई में भी देरी होगी.

प्रतिनिधि, सीवान. मोंथा तूफान ने जिला के किसानों के समक्ष बड़ी समस्या खड़ा कर दिया है. आमतौर पर अक्टूबर माह में बारिश नहीं होती है. लेकिन इस बार की बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर को तोड़ दिया है. खेत में धान की फसल तैयार हो गयी है. जबकि खेतों में पानी लगा हुआ है. इससे धान की फसल खेतों में ही सड़ रही है. वहीं दूसरी ओर रबी की बुआई में भी देरी होगी. कृषि विभाग द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक जिला में धान की खेती के लिए एक लाख दो हजार दो सौ छियालीस हेक्टेयर लक्ष्य निर्धारित था. लक्ष्य के विरुद्ध 93 हजार नौ तैतीस हेक्टेयर में धान की खेती हुई है. इधर दो दिनों में 76 एमएम बारिश हुई है. बेमौसम बारिश से किसान मायूस हो गए हैं. वहीं रबी के लिए 124 हजार हेक्टेयर में खेती करने का लक्ष्य है. मोंथा तूफान के प्रभाव से जहां धान की फसल बर्बाद हो गयी है. वहीं दूसरी ओर रबी की फसल की बुआई की चिंता लोगों को सता रही है. एक तरफ जहां हजारों एकड़ भूमि पर किसानों के लगे पके धान की फसल पानी में डूब कर बर्बाद हो गई, धान की उत्पादकता होगी प्रभावित कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बेमौसम बारिश से धान की उत्पादकता प्रभावित होगी . कटने को तैयार धान की फसल उनकी आंखों के सामने ही गिर गयी. किसानों की आंखों के सामने ही खेतों में पसीने की गाढ़ी कमाई बर्बाद हो रही है. किसान चाह कर भी इसे बचाने में असमर्थ हैं. मौसमी बीमारी की चपेट में आ सकते है लोग मौसम में जिस तरह बदलाव हो रहा है. वह सेहत के लिए ठीक नही है. कभी धूप निकल रहा है ,तो कभी ठंड का आभास हो रहा है. सुबह व शाम में ओस गिर रहा है. इस बदलते मौसम में लोग मौसमी बीमारी के चपेट में आ सकते है. चिकित्सक डॉ. संजय गिरि ने बताया कि बदलते मौसम में सावधानी जरूरी है. बोले अधिकारी दो दिन हुई बारिश से निचले इलाके में लगी धान की फसल को कुछ नुकसान हो सकता है. वहीं जो किसान धान की फसल काट दिये हैं, उनको भी नुकसान होने की संभावना है. रबी की बुवाई में देरी होने की संभावना है. डॉ आलोक कुमार, डीएओ, सीवान

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Author: DEEPAK MISHRA

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