जिले में 1.36 लाख हेक्टेयर में होगी रबी की खेती

धान की खेती के बाद अब किसानों की उम्मीदें रबी फसल पर टिकी हुई है. एक और जहां तेजी से धान कटनी का कार्य चल रहा है, वहीं दूसरी ओर रबी फसल के लिए खेतों को तैयार करने में किसान जुट गए हैं. इस वर्ष कृषि विभाग द्वारा जिले में करीब 1 लाख 36 हजार 395 हेक्टेयर भूमि में रबी फसल की खेती का लक्ष्य रखा गया है.

प्रतिनिधि, सीवान.धान की खेती के बाद अब किसानों की उम्मीदें रबी फसल पर टिकी हुई है. एक और जहां तेजी से धान कटनी का कार्य चल रहा है, वहीं दूसरी ओर रबी फसल के लिए खेतों को तैयार करने में किसान जुट गए हैं. इस वर्ष कृषि विभाग द्वारा जिले में करीब 1 लाख 36 हजार 395 हेक्टेयर भूमि में रबी फसल की खेती का लक्ष्य रखा गया है. कृषि विभाग के अनुसार एक लाख 9 हजार 987 हेक्टेयर भूमि में गेहूं की खेती की जाएगी.वही 8 हजार नौ सौ उनतीस हेक्टेयर भूमि दलहन तथा 8902 हेक्टेयर भूमि पर तेलहन की खेती होगी.इसके अलावा जौ ,मक्का,गन्ना तथा अन्य सीजनली फसल भी लगाए जाएंगे. इन फसलों की अच्छी उपज के लिए कृषि विभाग द्वारा उन्नत बीज के साथ-साथ किसानों को अन्य तरह की सुविधा उपलब्ध करने की बात कही जा रही है.औसत बारिश होने के कारण कई क्षेत्रों में धान की अच्छी पैदावार इस वर्ष हुई है. ऐसे में किसान रबी फसल के बेहतर उत्पादन की भी उम्मीद लगा रखे हैं. ठंड का आगमन और मौसम की अन्य सभी परिस्थितियों फिलहाल रबी फसल के लिए अनुकूल समझा जा रहा है. बरसात के अंतिम दिनों में अच्छी बारिश होने के साथ-साथ नदियों में पानी आ जाने के कारण भूजल स्तर की स्थिति में भी सुधार हुआ है.मोटर पंप सेट के सहारे खेतों की सिंचाई कर रबी फसल के लिए खेत तैयार करना किसानों के लिए आसान हो गया है. 15 दिसंबर तक बोआई का बेहतर समय रबी फसलों की बुआई व तापमान और पकते समय शुष्क और गर्म वातावरण की आवश्यकता होती हैं.रबी फसलें अक्सर नवम्बर के महीनों में बोयी जाती है. 15 दिसंबर तक इसकी बुवाई का आदर्श समय माना जाता है.जानकारों के अनुसार रबी फसल की सिंचाई के लिए भूमिगत जल संसाधनों पर आश्रित रहना पड़ता है. इसे देखते हुए किसानों को अपनी खेती की कार्य योजना सोच समझ के बनानी चाहिए. फसल के अच्छे उत्पादन के लिए गेहूं की बुआई उस जगह करें जहां सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध हों.अन्य स्थानों पर मसूर, सरसों, चना, मटर आदि फसल लगाएं। बीज उपचार और प्रभेद के अनुसार समय पर फसलों की बोआई करने से अच्छी उपज होगी. चना और मसूर की फसल की बुवाई में अब विलंब नहीं करें. गेहूं की बोआई भी 15 दिसंबर के अंदर कर ले. उन्नत व प्रतिरोधी किस्मों के बीजों की बोआई करें किसान जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि रबी फसलों में भरपूर उत्पादन प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि किसान उन्नत एवं प्रतिरोधी किस्मों के स्वच्छ स्वस्थ एवं पुष्ट बीजों की बोआई करें. फसल को प्रारंभ से ही रोग एवं कीटमुक्त रखने के लिए बीज का अनुशंसित बीज शोधक से उपचार अति आवश्यक है बीजों के अंदर और बाहरी सतह पर बीज जनित रोगाणु एवं कीट मिट्टी में मृदा जनित रोगाणु एवं कीट तथा हवा में वायु जनित रोगाणु एवं कीट सुषुप्त अवस्था में मौजूद रहते हैं. अनुकूल वातावरण मिलने पर ये अंकुरित पौधों में रोग के लक्षण उत्पन्न करते हैं. फफूंद जनित रोग होने पर फफूंदनाशी दवा से बीजोपचार करें.

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Author: DEEPAK MISHRA

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