सीवान में सीवरेज योजना में बदलाव का प्रस्ताव

शहर में दाहा नदी के बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए जिला प्रशासन ने अमृत 2.0 योजना के तहत प्रस्तावित सीवरेज व्यवस्था में व्यावहारिक बदलाव का सुझाव दिया है.जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजे अपने पत्र में कहा है कि मौजूदा भौगोलिक स्थिति और शहर की संरचना को देखते हुए पारंपरिक सीवरेज नेटवर्क आधारित शोधन संयंत्र के बजाय अवरोधन एवं मोड़ आधारित शोधन संयंत्र अधिक उपयोगी और किफायती साबित होगा.

संवाददाता, सीवान.शहर में दाहा नदी के बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए जिला प्रशासन ने अमृत 2.0 योजना के तहत प्रस्तावित सीवरेज व्यवस्था में व्यावहारिक बदलाव का सुझाव दिया है.जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने नगर विकास एवं आवास विभाग को भेजे अपने पत्र में कहा है कि मौजूदा भौगोलिक स्थिति और शहर की संरचना को देखते हुए पारंपरिक सीवरेज नेटवर्क आधारित शोधन संयंत्र के बजाय अवरोधन एवं मोड़ आधारित शोधन संयंत्र अधिक उपयोगी और किफायती साबित होगा. समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 24 एमएलडी क्षमता की सीवरेज योजना का काम विभाग की कार्यकारी एजेंसी को सौंपा गया है और निविदा प्रक्रिया चल रही है. वर्तमान स्थिति यह है कि शहर में पहले से बने नाले और अभी बन रहे अधिकांश नालों का पानी दाहा नदी में ही गिरता है. दाहा नदी शहर के बीच से उत्तर से दक्षिण दिशा में बहती है और उसमें लगातार गंदे पानी के मिलने से नदी का पानी काफी प्रदूषित हो चुका है.डीएम ने बताया कि इस समस्या को लेकर समृद्धि यात्रा के दौरान मुख्य सचिव से भी चर्चा की गई थी और उनसे मार्गदर्शन प्राप्त हुआ था. सुझाव दिया गया कि दाहा नदी के समानांतर दोनों किनारों पर पक्के नालों का निर्माण किया जाए और जो भी छोटे-बड़े नाले अभी नदी में गिर रहे हैं.उन्हें नए पक्के नालों से जोड़ दिया जाए. ऐसा होने पर शहर का सारा गंदा पानी ढलान के सहारे सीधे नदी के निचले हिस्से में बने शोधन संयंत्र तक पहुंच जाएगा. इससे बिना बड़े पैमाने पर खुदाई किए गंदे पानी का उपचार संभव हो सकेगा और नदी में सीधे गिरने वाले सीवेज को काफी हद तक रोका जा सकेगा. प्रशासन ने माना सीवरेज नेटवर्क बिछाना व्यावहारिक रूप से कठिन डीएम ने यह भी उल्लेख किया कि शहर की भौगोलिक बनावट और संकरी सड़कों के कारण पारंपरिक सीवरेज नेटवर्क बिछाना व्यावहारिक रूप से कठिन है.शहर के कई हिस्सों में सड़कें पतली हैं और पहले से ही यातायात जाम की समस्या बनी रहती है.ऐसे में बड़े स्तर पर पाइपलाइन बिछाने और खुदाई करने से आम लोगों को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ सकती है. इसके विपरीत, अवरोधन एवं मोड़ आधारित व्यवस्था में पहले से बने नालों का अधिकतम उपयोग किया जा सकेगा और जहां जरूरत होगी.वहीं सीमित निर्माण करना पड़ेगा.डीएम का मानना है कि इस विकल्प से खर्च भी अपेक्षाकृत कम आएगा, क्योंकि कई नाले पहले से बने हुए हैं और केवल आवश्यक स्थानों पर ही नए पक्के नालों का निर्माण करना होगा. इससे योजना का काम तेजी से पूरा होने की संभावना भी बढ़ेगी. साथ ही, दाहा नदी में सीधे गिरने वाले गंदे पानी को रोककर शहर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सकेगा.डीएम ने नगर विकास एवं आवास विभाग से अनुरोध किया है कि सीवरेज नेटवर्क आधारित शोधन संयंत्र के स्थान पर अवरोधन एवं मोड़ आधारित शोधन संयंत्र बनाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर आगे की कार्रवाई की जाए. आधुनिक सीवरेज नेटवर्क विकसित करने के लिए 367 करोड़ होने है खर्च शहर की स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अमृत 2.0 के तहत सीवरेज और जलापूर्ति से जुड़ी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं.नगर परिषद क्षेत्र के 25 वार्डों में आधुनिक सीवरेज नेटवर्क विकसित करने के लिए लगभग 367 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है.इसके अंतर्गत कुल 29,955 घरों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है ताकि गंदे पानी के निस्तारण की समस्या का स्थायी समाधान हो सके.परियोजना के तहत करीब 128 किलोमीटर लंबाई में सीवरेज पाइपलाइन बिछाई जाएगी. साथ ही चार मध्यवर्ती पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, जो घरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को मुख्य नाले तक पहुंचाने में सहायक होंगे. इसके अलावा 1.590 किलोमीटर राइजिंग मेन का निर्माण भी प्रस्तावित है. योजना के तहत घरों से निकलने वाले गंदे पानी को चेंबर के माध्यम से मुख्य नालों से जोड़ा जाएगा और बाद में शोधन संयंत्र से साफ कर नदी में प्रवाहित किया जाएगा, जिससे जल प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी. इसका शिलान्यास वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पचरुखी प्रखंड के जसौली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया था.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By DEEPAK MISHRA

DEEPAK MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >