60 पैक्स पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी

खरीफ विपणन मौसम 2024-25 में किसानों से धान खरीदने के बाद भी अब तक चावल नहीं जमा करने वाले पैक्स अध्यक्षों, प्रबंधकों और प्रबंधकारिणी सदस्यों की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं.जिला सहकारिता पदाधिकारी सौरभ कुमार ने बताया कि ऐसे 60 से अधिक पैक्स और व्यापार मंडलों के खिलाफ अब कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

प्रतिनिधि, सीवान. खरीफ विपणन मौसम 2024-25 में किसानों से धान खरीदने के बाद भी अब तक चावल नहीं जमा करने वाले पैक्स अध्यक्षों, प्रबंधकों और प्रबंधकारिणी सदस्यों की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं. जिला सहकारिता पदाधिकारी सौरभ कुमार ने बताया कि ऐसे 60 से अधिक पैक्स और व्यापार मंडलों के खिलाफ अब कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. संयुक्त निबंधक सहयोग समितियां, सारण प्रमंडल के निर्देश के अनुसार पहले चरण में संबंधित पैक्स और व्यापार मंडलों के खिलाफ संबंधित थाना में सनहा दर्ज कराना अनिवार्य किया गया है.इसके लिए जिला सहकारिता कार्यालय द्वारा सभी प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों और सहायक निबंधक को निर्देश जारी कर दिया गया है कि वे तत्काल प्रभाव से थाना में सनहा दर्ज करायें. ताकि आगे की दंडात्मक प्रक्रिया शुरू की जा सके. जिन प्रखंडों के पैक्स इस कार्रवाई के दायरे में हैं. उनमें आंदर, बड़हरिया, बसंतपुर, भगवानपुर हाट, दरौली, दरौंदा, गोरेयाकोठी, गुठनी, हसनपुरा, हुसैनगंज, लकड़ी नबीगंज, महाराजगंज, नवतन, पचरुखी, रघुनाथपुर, सिसवन और जीरादेई शामिल हैं. इन सभी क्षेत्रों में कुल 257 पैक्सों में से अब तक दर्जनों ने चावल की आपूर्ति नहीं की है.जिला सहकारिता पदाधिकारी ने साफ कहा कि अब कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.संबंधित पैक्स को कई बार चेतावनी दी गई, नोटिस भेजे गए. इसके बाद भी जब सुधार नहीं हुआ तो अब थाना में सनहा देकर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. उन्होंने यह भी बताया कि सभी प्रखंडों के सहकारिता पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे संयुक्त निबंधक के आदेश के अनुसार कार्रवाई को गंभीरता से लें और इसकी जानकारी नियमित रूप से जिला मुख्यालय को भेजें. जिले में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी हो गया है.जिला सहकारिता पदाधिकारी सौरभ कुमार ने कहा कि जिन पैक्सों ने अब तक चावल जमा नहीं किया है.उनके खिलाफ थाना में सनहा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है. सरकारी धान के मामले में किसी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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Author: DEEPAK MISHRA

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