सीवान के स्कूलों में शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी, पढ़ाई के साथ खेलकूद पर दिया गया जोर

बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए किताबी ज्ञान के साथ खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों का महत्व समझाया गया. शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी में 'खेलो और सीखो' की अवधारणा पर विशेष जोर दिया गया.

Teacher Parent Seminar: बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल किताबी शिक्षा पर्याप्त नहीं है. पढ़ाई के साथ खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों में भागीदारी भी जरूरी है. इसी संदेश के साथ शनिवार को जिले के विभिन्न विद्यालयों में शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

शिक्षा विभाग के निर्धारित कार्यक्रम के तहत महाराजगंज, दारौंदा, बसंतपुर, भगवानपुर, लकड़ी नबीगंज, आंदर, पचरुखी, दरौली, मैरवा, गोरेयाकोठी, तरवारा, जीरादेई, नौतन, गुठनी, रघुनाथपुर, सिसवन, हसनपुरा और हुसैनगंज सहित विभिन्न प्रखंडों के स्कूलों में संगोष्ठी आयोजित हुई.

जमसिकरी स्कूल में रहा ‘खेलो और सीखो’ पर जोर

उत्क्रमित मध्य विद्यालय जमसिकरी में आयोजित संगोष्ठी का केंद्र ‘खेलो और सीखो’ रहा. यहां शिक्षकों ने अभिभावकों के साथ बच्चों की पढ़ाई के अलावा उनके स्वास्थ्य, रुचि और व्यक्तित्व विकास को लेकर चर्चा की.

शिक्षकों ने कहा कि खेल के मैदान में बच्चे केवल शारीरिक गतिविधि नहीं करते, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व, सहयोग और निर्णय लेने की क्षमता भी सीखते हैं.

हार-जीत से मिलती है चुनौतियों से लड़ने की सीख

संगोष्ठी में बताया गया कि नियमित खेलकूद बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें हार और जीत दोनों को सहजता से स्वीकार करना सिखाता है. टीम आधारित खेलों से सहयोग की भावना और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है.

शारीरिक गतिविधियों से बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहने के साथ उनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता में भी सकारात्मक बदलाव आता है.

बच्चों की क्षमता के अनुसार रखें अपेक्षाएं

शिक्षकों ने अभिभावकों से बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से नहीं करने और परीक्षा व प्रदर्शन को लेकर उन पर अनावश्यक दबाव नहीं बनाने की अपील की.

उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे की अपनी क्षमता और रुचि होती है. अभिभावकों को बच्चों की पसंद और रुचि को समझते हुए उन्हें पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर देना चाहिए.

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तनावमुक्त माहौल में निखरेगी प्रतिभा

शिक्षकों ने कहा कि तनावमुक्त वातावरण में बच्चे अपनी प्रतिभा को बेहतर ढंग से निखार सकते हैं. इसलिए अभिभावकों को बच्चों को केवल अच्छे अंक लाने के लिए दबाव देने के बजाय उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.

शिक्षा और व्यक्तित्व विकास के लिए समन्वय पर जोर

कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों और अभिभावकों ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यवहार और व्यक्तित्व विकास के लिए आपसी समन्वय से काम करने पर जोर दिया. अभिभावकों से विद्यालय के साथ नियमित संवाद बनाए रखने की भी अपील की गयी.

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By मनीष गिरि

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