Siwan Pandit Siyaraman Tripathi: शहर के वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद् पंडित सियारमण त्रिपाठी की स्मृति में मंगलवार को स्वर्गीय सुभाष्कर पांडेय के आवास परिसर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई. कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्धजनों, साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.
साहित्यिक चेतना को नई दिशा देने वाले व्यक्तित्व
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. अशोक प्रियंवद ने कहा कि पंडित सियारमण त्रिपाठी ने कई दशकों तक सीवान की साहित्यिक चेतना को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की और अनेक पीढ़ियों में साहित्यिक संवेदना का विस्तार किया. उन्होंने कहा कि दिवंगता मां के नाम अंतिम पाती, सरसो सलोनी और गेहूं की बाली तथा सृष्टि और दृष्टि जैसी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने जीवन में सौंदर्यबोध और रागात्मक मूल्यों की स्थापना की.
उन्होंने बताया कि आर्ष काव्यों की सरल एवं सहज व्याख्या, संस्कृतनिष्ठ और अनुप्रासयुक्त भाषा, बिंब तथा प्रतीकों से युक्त उनके व्याख्यान आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवंत हैं. उन्होंने दशकों तक सीवान की गैर-राजनीतिक सांस्कृतिक, बौद्धिक और वैचारिक गतिविधियों का प्रभावी नेतृत्व किया.
शिक्षा और साहित्य में योगदान को किया याद
डॉ. नीलंजना त्रिपाठी ने कहा कि डीएवी कॉलेज में उनके अध्यापन काल में शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक छात्र आज देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं. प्रेमशंकर सिंह ने उनकी विनम्रता और सहज व्यक्तित्व को याद किया, जबकि प्रो. अवधेश शर्मा ने कहा कि उन्होंने नई पीढ़ी को साहित्य सृजन के लिए लगातार प्रेरित किया. डॉ. विजय पांडेय ने कहा कि पंडित सियारमण त्रिपाठी की प्रेरणादायी स्मृतियां आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी.
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
श्रद्धांजलि सभा में जिला दूरसंचार समिति सदस्य गणेश दत्त पाठक, अधिवक्ता डॉ. विजय पांडेय, डॉ. राजेश पांडेय, डॉ. राकेश तिवारी, आचार्य रंगनाथ उपाध्याय, वरीय बैंकर प्रेमशंकर सिंह, डॉ. नीलंजना त्रिपाठी, प्रो. अवधेश शर्मा, अवधेश दुबे, निशांत कुमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
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