Siwan News : जुलाई माह में मानसून सक्रिय होने के बाद जिले में धान रोपनी की रफ्तार तेज हो गई है. लगातार हो रही बारिश से खरीफ फसलों को नया जीवन मिला है और किसानों के चेहरे पर भी मुस्कान लौट आई है. जिला कृषि कार्यालय के अनुसार जुलाई में औसत वर्षापात 321 मिमी निर्धारित है, जबकि 25 जुलाई तक 350 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है. कृषि विभाग का मानना है कि यदि मानसून इसी तरह सक्रिय रहा तो धान समेत अन्य खरीफ फसलों का लक्ष्य समय पर पूरा हो जाएगा.
81 प्रतिशत खरीफ फसलों का हुआ आच्छादन
जिला कृषि कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अब तक निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले करीब 81 प्रतिशत खरीफ फसलों का आच्छादन हो चुका है. लगातार बारिश होने से धान रोपनी में तेजी आई है. विभाग का अनुमान है कि यदि अगले तीन-चार दिनों तक मौसम अनुकूल रहा तो रोपनी का प्रतिशत और तेजी से बढ़ेगा. किसानों ने बताया कि धान के बिचड़े पहले से तैयार थे, लेकिन खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण रोपनी प्रभावित हो रही थी. जून में कम बारिश होने से खेती लक्ष्य से पीछे रह गई थी.
बारिश से धान की फसल को मिली संजीवनी
जिन किसानों ने अपने संसाधनों से पहले ही धान की रोपाई कर ली थी, वे बारिश नहीं होने से चिंतित थे. अनियमित वर्षा के कारण सिंचाई प्रभावित होने से धान सहित अन्य खरीफ फसलों के पौधे मुरझाने लगे थे. अब लगातार बारिश से फसलों को नया जीवन मिला है. जुलाई की तेज धूप और उमस के कारण फसलों में रोग और खरपतवार बढ़ने लगे थे, लेकिन मौसम में बदलाव और वर्षा के बाद इन समस्याओं में भी कमी आई है. किसान बच्चा गिरी सहित अन्य किसानों ने बताया कि अब फसलों पर मौसमी रोगों का असर कम होने लगा है और खेती की स्थिति बेहतर हुई है.
धान रोपनी का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद
कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष जिले में धान की खेती का लक्ष्य 1,07,963 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है. इसके विरुद्ध अब तक 78,879 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपनी पूरी हो चुकी है. जून में मानसून कमजोर रहने से खेती प्रभावित हुई थी, लेकिन जुलाई में बारिश बढ़ने से रोपनी में तेजी आई है. विभाग को उम्मीद है कि समय रहते निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा.
वैकल्पिक फसलों की खेती की भी सलाह
कृषि विभाग ने किसानों को मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए वैकल्पिक खरीफ फसलों की खेती करने की भी सलाह दी है. विभाग का कहना है कि धान की नर्सरी लगाने के 35 दिनों के भीतर रोपाई कर देनी चाहिए. अधिक पुरानी नर्सरी के बिचड़ों से रोपाई करने पर कल्ले कम निकलते हैं और उत्पादन प्रभावित होता है. यदि किसी क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो किसान अरहर, उड़द, मूंग, मक्का, तिल तथा अन्य मोटे अनाज की खेती कर बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
क्या कहते हैं जिला कृषि पदाधिकारी
जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि मानसून सक्रिय होने से जिले में धान रोपनी में उल्लेखनीय तेजी आई है. यदि मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा तो सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस बार अच्छी बारिश के कारण धान की बेहतर पैदावार की भी उम्मीद जगी है.
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