Siwan News : सदर व महाराजगंज अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट डेढ़ साल से बंद

कोरोना काल में ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए पीएम केयर फंड से सदर अस्पताल में 1000 लीटर प्रति मिनट और महाराजगंज अनुमंडल अस्पताल में 500 लीटर प्रति मिनट उत्पादन क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था, जो डेढ़ साल से बंद है.

सीवान. कोरोना काल में ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए पीएम केयर फंड से सदर अस्पताल में 1000 लीटर प्रति मिनट और महाराजगंज अनुमंडल अस्पताल में 500 लीटर प्रति मिनट उत्पादन क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था. 10 जुलाई, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका वर्चुअल उद्घाटन किया था, लेकिन लगभग डेढ़ साल से दोनों प्लांट तकनीकी कारणों से बंद पड़े हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि देश में कोरोना की चौथी लहर की आहट के बावजूद स्वास्थ्य विभाग इन प्लांटों को दुरुस्त कराने में गंभीरता नहीं दिखा रहा है. दोनों अस्पतालों में प्लांट से ऑक्सीजन आपूर्ति की जगह अब सिलिंडर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के सहारे काम चलाया जा रहा है. मॉडल सदर अस्पताल के आपात कक्ष और एसएनसीयू में ऑक्सीजन सिलेंडरों के माध्यम से पाइप लाइन से मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है. वार्डों में छोटे सिलिंडर या ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से जरूरत पूरी की जा रही है. गंभीर लापरवाही यह है कि इन प्लांटों के संचालन के लिए अब तक ऑपरेटर की नियुक्ति नहीं की गयी. जरूरत पड़ने पर अस्पताल कर्मी ही प्लांट चालू करते थे, जिसके चलते रखरखाव के अभाव में यह पूरी तरह खराब हो गया.

प्रतिदिन 10 हजार रुपये की होती है ऑक्सीजन सिलिंडर की खरीद

सीवान सदर अस्पताल में पिछले डेढ़ साल से ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़ा है, जिससे मरीजों को सिलेंडर के सहारे ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है. इस व्यवस्था से अस्पताल प्रशासन को प्रतिदिन करीब 10 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. बताया जाता है कि प्लांट से दो नवंबर, 2023 से किसी भी वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाइ नहीं हो रही है. अस्पताल में सबसे अधिक ऑक्सीजन की खपत एसएनसीयू और आपातकालीन वार्ड में होती है. यहां प्रतिदिन 15 से 20 सिलिंडरों की जरूरत होती है. एक सिलिंडर की खरीद, भराई और ट्रैवलिंग पर औसतन 600 रुपये का खर्च आता है, जबकि ऑक्सीजन प्लांट से नि:शुल्क ऑक्सीजन मिलती है और सिर्फ बिजली का खर्च वहन करना पड़ता है. इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन प्लांट की तकनीकी खराबी को ठीक नहीं करा सका है. विशेषज्ञों का कहना है कि प्लांट को चालू कर अस्पताल प्रशासन प्रतिदिन की यह अतिरिक्त राशि बचा सकता है. स्थानीय लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि इस लापरवाही के चलते न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि आपात स्थिति में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति भी संकट में पड़ सकती है.

एक मिनट में में 1000 लीटर उत्पादन की है क्षमता

सीवान सदर अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट की उत्पादन क्षमता प्रति मिनट 1000 लीटर है, जबकि महाराजगंज अनुमंडलीय अस्पताल के प्लांट की क्षमता 500 लीटर प्रति मिनट है. इन प्लांटों से डायरेक्ट पाइपलाइन के जरिए वार्डों में ऑक्सीजन आपूर्ति और सिलिंडरों में गैस भरने की योजना थी. सरकार की मंशा थी कि इन प्लांटों से स्थानीय जरूरतों के अलावा अन्य अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाये, लेकिन प्लांट शुरू होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन सिलिंडरों में गैस भरने की व्यवस्था नहीं कर सका. स्थिति यह है कि अब सदर अस्पताल खुद के लिए भी ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन लेने में असमर्थ साबित हो रहा है. तकनीकी खराबी और रखरखाव के अभाव में प्लांट वर्षों से ठप पड़ा है. जिससे सरकारी संसाधनों का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा है.

क्या कहते हैं जिम्मेदार

ऑक्सीजन प्लांट को ठीक करने के लिए संबंधित एजेंसी एवं विभाग को पत्र लिखा गया है. ऑक्सीजन प्लांट खराब होने के कारण बाजार से गैस खरीदनी पड़ती है. प्लांट को ठीक करने के लिए समय समय पर रिमाइंडर दिया गया है. डॉ अनिल कुमार सिंह, अधीक्षक, सदर अस्पताल

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