siwan news. गांधी जयंती पर मरीजों को समय पर इलाज की ली जायेगी शपथ, लेकिन जिम्मेदारों के पद वर्षाें से खाली

संचारी रोग पदाधिकारी नहीं, एसीएमओ का पद भी खाली, 19 प्रखंडों में केवल आठ पीएमडब्ल्यू होने से हो रही समस्या

सीवान . राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को जिले के सभी विभागों व कार्यालयों में विशेष सभा आयोजित कर सामाजिक समरसता की शपथ दिलायी जायेगी. अधिकारी और कर्मचारी संकल्प लेंगे कि कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों को समय पर इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जायेगा. उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा और दिव्यांगजनों को योजनाओं, प्रमाणपत्र व पेंशन जैसी सुविधाएं दिलाने में सहयोग किया जाएगा. मंचों से गांधीजी के समानता और मानवता के संदेश को आत्मसात करने का आह्वान भी होगा. लेकिन सवाल यह है कि जिस जिले में कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम पूरी तरह भटक चुका हो, वहां ऐसी शपथों का अर्थ क्या रह जाता है? प्रखंडों की बात छोड़िए, जिला यक्ष्मा केंद्र में ही वर्षों से मेडिकल ऑफिसर का पद खाली पड़ा है. जिले के 19 प्रखंडों के पीएचसी, सीएचसी, रेफरल, अनुमंडलीय अस्पताल और दो शहरी पीएचसी मिलाकर कुष्ठ मरीजों के इलाज के लिए सिर्फ 8 पीएमडब्ल्यू कार्यरत हैं. 27 अचिकित्सा सहायकों में 26 पद वर्षों से खाली हैं.

ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में कुष्ठ मरीजों को लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं

ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में कुष्ठ मरीजों के इलाज को लेकर विभाग का कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है. परिणामस्वरूप संदिग्ध मरीजों को सदर अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, जबकि सदर अस्पताल में भी इसकी समुचित व्यवस्था नहीं है. मरीज गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक इलाज नहीं, सिर्फ भटकाव झेलने को मजबूर हैं. छह अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2025 तक चले विशेष कुष्ठ रोगी खोजी अभियान में स्वास्थ्य विभाग ने 5,43,661 घरों का भ्रमण कर 27,53,616 लोगों की जांच की. इस दौरान 613 संदेहास्पद मरीजों की जांच हुई, जिनमें 37 नये कुष्ठ मरीज मिले. विभाग यह कहकर संतोष जताता है कि जिले का कुष्ठ प्रीवेलेंस रेट 0.37 है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रणाली ही बीमार है. सबसे गंभीर तथ्य यह है कि जिले में कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम की निगरानी के लिए अब तक कोई संचारी रोग पदाधिकारी पदस्थापित नहीं किया गया है. जिले की कमान एसीएमओ के जिम्मे है, लेकिन यह पद भी वर्षों से खाली है. रूटीन कार्य के लिए प्रभारी एसीएमओ बनाए गए हैं, पर वित्तीय अधिकार नहीं होने से योजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ पा रहीं.

1070 कुष्ठ मरीज दर्ज, इनमें से 135 की मौत

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 1070 कुष्ठ मरीज दर्ज हैं, जिनमें 135 की मौत हो चुकी है. पिछले साल के नए मामलों को मिलाकर वर्तमान में 927 मरीज हैं. कुष्ठ विभाग ने 224 ग्रेड-2 मरीजों को प्रमाण पत्र जारी किए हैं, लेकिन सरकार की स्पष्ट योजना के बावजूद केवल 76 मरीजों को ही बिहार शताब्दी कुष्ठ कल्याण योजना के तहत 1500 रुपये पेंशन मिल रही है, जबकि 99 मरीजों को सिर्फ दिव्यांग पेंशन दी जा रही है. दोनों पेंशन देने की सरकारी घोषणा आज भी फाइलों में कैद है.ऐसे में गांधीजी के नाम पर दिलाई जाने वाली शपथ एक कड़वा सवाल छोड़ जाती है, जब इलाज, डॉक्टर, स्टाफ और पेंशन तक नहीं, तो क्या यह आयोजन मानवता का संदेश है या सिर्फ सरकारी औपचारिकता.

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