Life Imprisonment: अपर जिला न्यायाधीश नवम सुशांत रंजन की अदालत ने बुधवार को बच्चे की हत्या के आरोप में मृतक की चाची रागिनी देवी को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनायी. अदालत ने रागिनी देवी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. अर्थदंड नहीं देने की स्थिति में अभियुक्त को दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी.
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दरौली थाना अंतर्गत गोपालपुर गांव निवासी बजरंगी सिंह 22 दिसंबर 2022 को घर से बाहर थे. इसी दौरान उनकी पत्नी ने बजरंगी सिंह को सूचना दी कि उनकी भवह मंजू देवी एवं रागिनी देवी ने षड्यंत्र कर उनके बच्चे सुमंत कुमार उर्फ बबुआ जी की गला दबाकर हत्या कर दी है और शव को गड्ढे में फेंक दिया है. उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने रागिनी देवी को बच्चे सुमंत को ले जाते हुए देखा है.
सूचना मिलने पर बजरंगी सिंह घर पहुंचे. खोजबीन करने पर बच्चे का शव गड्ढे में पाया गया. इसके बाद अगले दिन दरौली थाने में अपनी भवह मंजू देवी और रागिनी देवी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी. इस संबंध में दरौली थाना कांड संख्या 364/2022 दर्ज किया गया.
प्रत्यक्ष गवाह नहीं होने पर एक आरोपी को मिला संदेह का लाभ
मामले की सुनवाई के दौरान अन्य गवाहों ने भी घटना की पुष्टि की. हालांकि, प्रत्यक्ष गवाह नहीं होने के कारण अदालत ने एक आरोपी मंजू देवी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया.
वहीं, अदालत ने रागिनी देवी को दोषी पाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनायी. इसके साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है. अर्थदंड नहीं देने पर दो माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक याहिया खान तथा बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता शंभू सिंह ने बहस की.
