आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस हुआ जर्जर

सदर अस्पताल का आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस, जिस पर सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर अत्याधुनिक भवन बनाने का दावा किया था, आज खुद ही मरम्मत की गुहार लगा रहा है. भवन की हालत इतनी खस्ता हो गई कि दीवारें दरक गईं, ग्रिल टूट गई और अंदर-बाहर गंदगी का अंबार लग गया.

प्रतिनिधि,सीवान. सदर अस्पताल का आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस, जिस पर सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर अत्याधुनिक भवन बनाने का दावा किया था, आज खुद ही मरम्मत की गुहार लगा रहा है. भवन की हालत इतनी खस्ता हो गई कि दीवारें दरक गईं, ग्रिल टूट गई और अंदर-बाहर गंदगी का अंबार लग गया. सदर अस्पताल परिसर के बगल में बने इस अत्याधुनिक पोस्टमार्टम हाउस की हालत निर्माण के कुछ ही महीनों बाद दयनीय हो चुकी है. विभाग ने लगभग 53 लाख से इस भवन का निर्माण कराया था. निर्माण कार्य पूरा होने व कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 2016 में यह भवन औपचारिक रूप से सदर अस्पताल को सौंप दिया गया. लेकिन आज स्थिति यह है कि भवन खुद अपनी मरम्मत की मांग कर रहा है. नौ साल में ही दीवारें दरकने लगीं, ग्रिल जर्जर हो गईं और सीढ़ियों की रेलिंग उखड़ चुकी है. यही नहीं, भवन के मुख्य द्वार पर लगे ग्रिल भी टुट चुका हैं. जब नया पोस्टमार्टम हाउस बनने की बात सामने आई थी तो स्वास्थ्यकर्मियों से लेकर आम लोगों तक को उम्मीद जगी थी कि अब परेशानियों से निजात मिलेगी. गुणवत्ता पर सवालिया निशान: भवन की हालत देखकर निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. अंदर-बाहर की दीवारों पर दरारें साफ दिखती हैं. बारिश के पानी से जम चुकी है, वहीं जगह-जगह जंगली पेड़-पौधे उग आए हैं. लगे मार्बल टूट चुके हैं और आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है. शव लाने के लिए बनाई गई रैंप के पास कूड़ा-कचरा फैला रहता हैै.मालूम हो कि इसके निर्माण से पहले पोस्टमार्टम का काम एक जर्जर एस्बेस्टस शेड में किया जाता था. उसी कमरे में शव सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी नहीं थी. गर्मी, बरसात और अंधेरे में यह काम काफी जोखिम भरा और असुविधाजनक साबित होता था. शाम के बाद पोस्टमार्टम करना तो लगभग असंभव हो जाता था. रोशनी के लिए टॉर्च और अस्थायी बल्ब का सहारा लेना पड़ता था.सदर अस्पताल के प्रबंधक कमलजीत कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में है. इस संबंध में वरीय पदाधिकारियों से बातचीत कर मरम्मत कराया जायेगा.

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Author: DEEPAK MISHRA

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