माह-ए-रमजान के पहले दिन रोजेदारों ने रखा रोजा

महाराजगंज माह-ए-रमजान रविवार से शुरू हो गया. रोजेदारों ने पहला रोजा रखा. रोजा के साथ ही पहला अशरा भी शुरू हो गया. रोजेदारों ने शहर के पुरानी बाजार स्थित शाही जामा मस्जिद, नखासा चौक स्थित छोटी मस्जिद,देवरिया,टेघड़ा, भीखाबाध आदि मस्जिदों में रमजान के पांचों वक्त की नमाज अदा की.

By Prabhat Khabar News Desk | March 2, 2025 9:22 PM

प्रतिनिधि, महाराजगंज माह-ए-रमजान रविवार से शुरू हो गया. रोजेदारों ने पहला रोजा रखा. रोजा के साथ ही पहला अशरा भी शुरू हो गया. रोजेदारों ने शहर के पुरानी बाजार स्थित शाही जामा मस्जिद, नखासा चौक स्थित छोटी मस्जिद,देवरिया,टेघड़ा, भीखाबाध आदि मस्जिदों में रमजान के पांचों वक्त की नमाज अदा की.शाही जामा मस्जिद के इमाम मौलाना इसरारुल हक ने कहा कि रोजा इबादत के साथ ही अच्छाई का सीख देता है. उन्होंने कहा कि रमजान के महीने में नवाफिल सुन्नते व फरायेज के दरजात को बुलंद कर दिए जाते हैं. यह महीना अमन के साथ खुशियों का पैगाम देकर अल्लाह के फरमान को पूरा करने का है.मौलाना ने कहा कि दिन भर रोजेदार अल्लाह की इबादत और कुरान की तलावत करने में मशरूफ रहते हैं. माह-ए-रमजान की एक रात लैलतुल कदर के नाम से जानी जाती है.कुरान पाक में जिसकी फजीलत ब्यान की गई है, जो हजारों रात से अफजल करार दिया गया है.बंदों के लिए खास रहमत की बारिश इस महीने में होती है.रोजेदार अल्लाह की इबादत व तिलावत करने में मशरूफ रहते हैं.वहीं रमजान को लेकर शहर से ग्रामीण इलाके के तमाम मस्जिदें गुलजार होने लगी है. कुरान शरीफ पड़ता है नन्हा रोजेदार माह-ए-रमजान में रोजे के फर्ज को अदा करने में बुजुर्गो का हौसला अफजाई बच्चे भी कर रहे हैं.अपने रब को राजी करने के लिए नन्हे-नन्हे रोजेदार रमजान के अरकान को पूरा कर अल्लाह के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं.शहर के मोहन बाजार निवासी लबीब,एहसान, इस्माइल,इब्राहिम तथा लारेंब आदि बच्चों ने रोजा रख रहा है. रोजा रखने के साथ ही कुरान की तिलावत कि. कक्षा सातवीं के छात्र लबीब सरताज ने बताया कि घर में बड़ों को देखकर रविवार को पहला रोजा रखा. रोजा रखने से पहले सहरी साथ में की और इफ्तार भी साथ में ही खोला, लारेंब ने कहा कि रमजान में रोजेदारों को कुरान शरीफ की तिलावत करनी चाहिए.वही असीफा,आलिया आफिया परवीन भी रोजा रखकर नमाज भी अदा करती है.कहती हैं कि अल्लाह सबको नेक रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाए. माह-ए-रमजान की फजीलत को हासिल करने के लिए रोजा रखना जरूरी है.

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