लक्ष्य के करीब पहुंची खरीफ की खेती

अगस्त में प्रतिदिन बारिश हो रही है. जिसके चलते खरीफ फसल को नया जीवन मिला है. वहीं धान की रोपनी की रफ्तार में भी बढ़ी है. मॉनसून ऐसे ही मेहरबान रहा तो कृषि विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार धान सहित अन्य खरीफ की फसलों का आच्छादन हो जायेगा. साथ ही खरीफ फसल के अच्छी पैदावार से किसानों की स्थिति में भी सुधार होगा.

प्रतिनिधि, सीवान.अगस्त में प्रतिदिन बारिश हो रही है. जिसके चलते खरीफ फसल को नया जीवन मिला है. वहीं धान की रोपनी की रफ्तार में भी बढ़ी है. मॉनसून ऐसे ही मेहरबान रहा तो कृषि विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार धान सहित अन्य खरीफ की फसलों का आच्छादन हो जायेगा. साथ ही खरीफ फसल के अच्छी पैदावार से किसानों की स्थिति में भी सुधार होगा. अगस्त माह के शुरू होते ही बीच बीच में हो रही बारिश ने अब रफ्तार पकड़ ली है. बारिश ने धान की रोपनी करने के लिए व्याकुल किसानों को काफी राहत दी है. किसानों को बारिश का साथ मिलने से धान की रोपनी में तेजी आ गई है. जिला कृषि कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक लक्ष्य के विरुद्ध करीब 95.99 फीसदी खरीफ फसल का आच्छादन हो गया है. यदि इसी रफ्तार से बारिश का साथ मिला तो निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक धान की रोपनी होगी. अगर तीन-चार दिनों तक और मौसम का साथ किसानों को मिला, तो धान की रोपनी का आंकड़ा तेजी से बढ़ेगा. किसानों ने बताया कि धान के बिचड़े तैयार हो गए थे, लेकिन खेतों में पानी नहीं रहने के कारण धान की रोपनी में तेजी नहीं आ रही थी.जून व जुलाई माह में बारिश पर्याप्त मात्रा में नही हुई. थोड़े बहुत किसानों ने मोटर पंप की सहायता से रोपनी की थी. धान की फसल को मिली संजीवनी जो किसान अपने संसाधनों से धान रोपनी कर चके थे,वे बारिश नही होने से चिंतित थे. अनियमित बारिश की वजह से धान की फसल को नियमित रुप से सिंचाई नहीं हो पा रही थी. जिस वजह से धान सहित अन्य खरीफ फसलों के पौधे मुरझा रहे थे. इधर अगस्त माह में प्रतिदिन बारिश होने से धान की फसल को नया जीवन मिला है. जुलाई माह में कड़ाके की हुई धूप और उमस भरी गर्मी के कारण धान की फसल में रोग व खर पतवार पनपने लगा था. जिसके कारण फसलें के तने पीले पड़कर सूखने लगे थे.जैसे ही मौसम में ठंडक आई, वर्षा की बौछारें फसल पर पड़ी वह रोग स्वतः समाप्त होने लगा है. जिससे किसान राहत महसूस किए. किसान बच्चा गिरी सहित अन्य लोगों ने बताया कि उमस के कारण फसल पर अन्य मौसमी रोग प्रभावी हो रहे थे, उससे भी अब निजात मिल जायेगी. लक्ष्य से पिछड़ गयी थी खेती जून व जुलाई में मानसून के निष्क्रिय रहने के चलते जिले की खेती लक्ष्य से पिछड़ गयी थी. किसान सूखा पड़ने की आशंका से चिंतित हो उठे थे. इधर जुलाई के अंत व अगस्त माह में मानसून सक्रिय हुआ. जिससे धान रोपनी की रफ्तार बढ़ी. जिला कृषि कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक इस वर्ष खरीफ फसल के लिए एक लाख 26 हजार आठ सौ पचास हेक्टेयर निर्धारित था. जिसके विरुद्ध एक लाख 17 हजार नौ सौ तेईस हेक्टेयर में खरीफ का आच्छादन हुआ है. वही धान की खेती के लिए एक लाख दो हजार दो सौ छियालीस हेक्टेयर लक्ष्य निर्धारित है. अभी तक 93 हजार नौ तैतीस हेक्टेयर में धान की रोपनी हुई है. क्या कहते हैं जिम्मेवार मॉनसून की सक्रिय होने के चलते धान की रोपनी में तेजी आयी है. अगर यही स्थिति रही तो निर्धारित लक्ष्य को यथाशीघ्र हासिल हो जाएगा. साथ ही अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी है. डॉ. आलोक कुमार, डीएओ, सीवान

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Author: DEEPAK MISHRA

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