जलमीनार हुआ बेकार, पानी के लिए लोग परेशान

अनुमंडल के दरौंदा प्रखंड के रुकुंदीपुर पंचायत के धनौता गांव के वार्ड संख्या दस में हर घर नल से जल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने के लिए लाखों रुपये की लागत से तैयार किया गया जलमीनार ग्रामीणों के लिए एक मजाक बनकर रह गया है.गांव के आम लोग विवश होकर चापानल से आयरन युक्त पानी पीते को मजबूर हैं.

प्रतिनिधि, महाराजगंज. अनुमंडल के दरौंदा प्रखंड के रुकुंदीपुर पंचायत के धनौता गांव के वार्ड संख्या दस में हर घर नल से जल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने के लिए लाखों रुपये की लागत से तैयार किया गया जलमीनार ग्रामीणों के लिए एक मजाक बनकर रह गया है.गांव के आम लोग विवश होकर चापानल से आयरन युक्त पानी पीते को मजबूर हैं. सरकार द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना का आम लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है.साल 2020 में प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के कई वार्डों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए लाखों रुपये की लागत से जल मीनार बनाने का काम शुरु कराया गया.नल-जल योजना पूरा होने के बावजूद जलमीनार से शुद्ध व स्वच्छ जल की आपूर्ति नहीं हो सकी है. जिसमें आमलोगों ने विभाग के अधिकारियों को जिम्मेवार मान रहे हैं. पंचायत की मुखिया बबीता देवी के अनुसार धनौता स्थित वार्ड संख्या दस में कई माह से न तो जलापूर्ति नहीं हो रही है और न हीं सभी घरों तक नल पहुंच पायी है.वहीं वार्ड दस के विजेंद्र सिंह, कैलाश राम, पप्पू पांडेय, मुकेश, वरुण, फगुनी दवी, प्रमिला देवी आदि ने कहा कि कई महीने से इस गांव में पेयजल के नाम पर केवल चापानल हीं सहारा है. जबकि पूरे गांव के चापानल से आयरन युक्त पानी निकलने के बाद भी विवश होकर पीना पड़ता है.चापानल के पानी पीने से अक्सर लोग बीमार हो जाते हैं.इसके बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारी नल के जल की समस्या को दूर करने में उदासीन बने हुए है. इसके लिए कई बार स्थानीय विधायक सहित विभाग के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी आदि से नल जल की सुविधा सुचारु कराने का लगातार गुहार लगा चुके है.इसके बावजूद किसी ने इस समस्या पर अभी तक गंभीरता नहीं बरत सकी है.जिसका खामियाजा आमलोगों को भुगतना पड़ रहा है. इस समस्या से एक भी पंचायत अछूता नहीं है.पीएचइडी के कनीय अभियंता ने बताया कि वार्ड संख्या दस में लगे जलापूर्ति की समस्या की जांच कर जल्द हीं जलापूर्ति की सुविधा बहाल कर ली जाएगी. जलमीनार का नहीं मिल रहा है कोई फायदा इलाके के लोगों में पानी पहुंचाने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से बनाई गई जलमीनार अब ग्रामीणों की प्यास बुझाने के बजाय बेकार साबित हो रही है.जिस स्थान पर यह जलमीनार बनाई गई है, वही इसकी सबसे बड़ी विफलता का कारण है. तकनीकी मानकों और स्थानीय भूगोल की अनदेखी करते हुए इसे ऐसे स्थल पर बना दिया गया, जहां से न तो पर्याप्त दबाव बन पा रहा है और न ही पानी की सुचारू सप्लाई संभव हो पा रही है. नतीजा यह कि वर्षों बाद भी योजना सिर्फ कागज पर सफल दिखती है, जबकि जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है. ग्रामीण बताते हैं कि जलमीनार ऐसे स्थान पर खड़ा कर दिया गया जहां जलस्रोत की पहुंच ही नहीं है. पाइपलाइन बिछाने में लगातार बाधाएं आती हैं. जलमीनार सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम है.

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Author: DEEPAK MISHRA

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