Siwan News : बसों पर नहीं दिख रहीं जरूरी सूचनाएं मनमानी वसूली से यात्री परेशान

परिवहन विभाग के निर्देशों के बावजूद जिले में चल रही बसों पर महत्वपूर्ण सूचनाएं जैसे निर्धारित किराया, रूट और यात्री सुविधाएं नहीं प्रदर्शित की जा रही हैं. विभागीय आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है, लेकिन स्थानीय अधिकारी मौन साधे हुए हैं.

महाराजगंज. परिवहन विभाग के निर्देशों के बावजूद जिले में चल रही बसों पर महत्वपूर्ण सूचनाएं जैसे निर्धारित किराया, रूट और यात्री सुविधाएं नहीं प्रदर्शित की जा रही हैं. विभागीय आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है, लेकिन स्थानीय अधिकारी मौन साधे हुए हैं. इसका खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है. महाराजगंज से अफराद की मात्र 10 किलोमीटर की दूरी के लिए यात्रियों से तीन व चार पहिया वाहनों द्वारा प्रति यात्री 40 रुपये वसूले जा रहे हैं. विभागीय नियंत्रण के अभाव में बस संचालक मनमाने किराए व रूट पर वाहन चला रहे हैं. यात्रियों और चालकों के बीच किराये को लेकर आये दिन विवाद की स्थिति बन रही है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है. जानकारी के अनुसार महाराजगंज मुख्यालय के तीन अस्थायी बस स्टैंडों से प्रतिदिन 70 से अधिक वाहन छपरा, पटना, सीवान, बसंतपुर, तरवारा, जनता बाजार जैसे स्थानों के लिए बसें चलती हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर बसें न तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करती हैं और न ही परिवहन विभाग के नियमों का. बसों में किराया सूची, चालक का विवरण, हेल्पलाइन नंबर जैसी अनिवार्य सूचनाएं नहीं प्रदर्शित हैं. विभागीय अधिकारी स्थिति की जानकारी के बावजूद कार्रवाई से परहेज कर रहे हैं, जिससे बस संचालकों के हौसले बुलंद हैं और यात्री परेशान.

इन सूचनाओं का होना है अनिवार्य

विभागीय निर्देश के अनुसार प्रत्येक बस पर किराया सूची, समय-सारणी, चालक व बस मालिक का नाम व मोबाइल नंबर, तथा निर्धारित रूट के परमिट की जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित होनी चाहिए. लेकिन अधिकतर बसों में केवल रूट लिखा होता है, कुछ में फोन नंबर तो होता है, पर यह स्पष्ट नहीं होता कि वह नंबर किसका है. हैरानी की बात यह है कि अनुमंडल मुख्यालय से प्रतिदिन पांच दर्जन से अधिक वाहन परिचालित होते हैं, फिर भी नियमों की अनदेखी जारी है और विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है.

जांच के नाम पर होती है खानापूर्ति

परिवहन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अक्सर सड़क पर वाहनों की जांच करने का दावा करते हैं, लेकिन यह सिर्फ खानापूर्ति मात्र होती है. खासकर मार्च क्लोजिंग के समय जब विभाग सख्त होता है, तब भी मामूली जांच कर अधिकारी अपने कर्तव्य से बच निकलते हैं. बसों के मामले में नियम पूरी तरह से लागू नहीं हो रहे हैं, जिससे मनमाना किराया वसूली आम बात हो गई है. विभाग की सुस्ती के कारण यात्रियों को आवश्यक सुविधाएं भी नहीं मिल पाती हैं, जिससे उनकी यात्रा परेशानियों से भरी होती है.

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