solar power plant: सरकारी विद्यालयों को स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है. राज्य के सरकारी स्कूलों की छतों पर रूफटॉप सोलर पावर सिस्टम स्थापित किए जाएंगे. योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, अनुश्रवण और नियमित समीक्षा के लिए प्रत्येक जिले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान को जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है.
शिक्षा विभाग के राज्य परियोजना निदेशक धर्मेंद्र कुमार ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (ईई एंड एसएसए) को निर्देश जारी किया है. विभाग ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तर पर जिम्मेदारियां भी तय कर दी हैं.
सरकारी स्कूलों में ब्रेडा के माध्यम से लगेंगे सोलर प्लांट
जारी निर्देश के अनुसार भारत सरकार की ओर से शैक्षणिक संस्थानों में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और सतत आधारभूत संरचना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकारी विद्यालयों में रूफटॉप सोलर पावर सिस्टम लगाने पर विशेष जोर दिया गया है.
विद्यालय भवनों की छतों पर ब्रेडा (बिहार रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी) के माध्यम से रेस्को मॉडल के तहत ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे. इस योजना को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
ब्रेडा के अधिकारियों से समन्वय की जिम्मेदारी
जिला स्तर पर नामित नोडल पदाधिकारी योजना के प्रभावी समन्वय, क्रियान्वयन और अनुश्रवण की जिम्मेदारी संभालेंगे. उन्हें ब्रेडा के सहायक परियोजना अभियंता के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर सोलर प्लांट स्थापना की प्रगति सुनिश्चित करनी होगी.
इसके अलावा विद्यालयों में सोलर पावर प्लांट लगाने से संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा की जाएगी. नोडल पदाधिकारियों को योजना में आने वाली समस्याओं के समाधान और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर कार्य को निर्धारित समय-सीमा में आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया है.
15 दिनों में देना होगा प्रगति प्रतिवेदन
शिक्षा विभाग ने सभी नामित नोडल पदाधिकारियों को निर्धारित प्रपत्र में वांछित प्रतिवेदन 15 दिनों के अंदर अधोहस्ताक्षरी कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. इससे जिलों में योजना की प्रगति की नियमित निगरानी की जा सकेगी.
सौर ऊर्जा से पूरी होगी स्कूलों की बिजली जरूरत
रूफटॉप सोलर पावर सिस्टम लगाने की योजना लागू होने से सरकारी विद्यालयों में बिजली की जरूरत को सौर ऊर्जा के माध्यम से पूरा करने में मदद मिलेगी. इससे विद्यालयों की पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होने के साथ स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा. शिक्षा विभाग की यह पहल सरकारी स्कूलों में सतत और पर्यावरण अनुकूल आधारभूत संरचना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
