Siwan News: जिले के 10 सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को वित्तीय वर्ष 2023-24 में बेंच-डेस्क खरीद से संबंधित मूल बिल कार्यालय में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (लेखा) कुमार अभिजीत ने इस संबंध में पत्र जारी करते हुए संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से जल्द आवश्यक अभिलेख जमा करने को कहा है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि राशि के समायोजन की प्रक्रिया मूल बिल प्राप्त होने के बाद ही पूरी की जा सकेगी.
बेंच-डेस्क खरीद के लिए भेजी गई थी राशि
डीपीओ (लेखा) कुमार अभिजीत ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान विद्यालयों में उपस्कर (बेंच-डेस्क) की खरीद के लिए बिहार सरकार की ओर से संबंधित विद्यालयों के जीओबी बैंक खातों में राशि हस्तांतरित की गई थी. राशि खर्च होने के बाद नियमानुसार मूल बिल एवं अन्य आवश्यक अभिलेख कार्यालय में जमा कर राशि का समायोजन कराया जाना अनिवार्य है.
10 विद्यालयों ने अब तक नहीं जमा किए मूल बिल
विभागीय समीक्षा में पाया गया कि जिले के 10 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने अब तक बेंच-डेस्क खरीद से संबंधित मूल बिल कार्यालय में जमा नहीं कराया है. इसके कारण वित्तीय समायोजन की प्रक्रिया लंबित है. डीपीओ ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रधानाध्यापकों को शीघ्र मूल अभिलेख उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.
इन विद्यालयों से मांगा गया है मूल बिल
जिन विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को मूल बिल जमा करने का निर्देश दिया गया है, उनमें शामिल हैं—
- मध्य विद्यालय भुलौनी, गुठनी
- मध्य विद्यालय किलपुर नवतन
- उत्क्रमित मध्य विद्यालय किशुनपाली, दरौली
- उत्क्रमित मध्य विद्यालय सोहीलपट्टी, बसंतपुर
- राजकीय मध्य विद्यालय टारी, रघुनाथपुर
- राजकीय मध्य विद्यालय छोटका माझा, जीरादेई
- मध्य विद्यालय धनौती, दरोगा नगर (हसनपुरा)
- उत्क्रमित मध्य विद्यालय सहली, हसनपुरा
- उत्क्रमित मध्य विद्यालय तियाय, आंदर
- मध्य विद्यालय सोहगरा, गुठनी
समय पर अभिलेख जमा करने का निर्देश
डीपीओ (लेखा) ने सभी संबंधित प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया है कि बेंच-डेस्क खरीद से संबंधित मूल बिल एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज बिना विलंब कार्यालय में उपलब्ध कराएं, ताकि राशि का समायोजन समय पर किया जा सके. उन्होंने कहा कि वित्तीय अभिलेखों का समय पर संधारण एवं जमा करना सभी विद्यालयों की प्रशासनिक जिम्मेदारी है. यदि निर्धारित समय में मूल बिल उपलब्ध नहीं कराया गया तो विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है.
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