Siwan News : सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर, बायोमेट्रिक हाजिरी का विरोध

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर सभी सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने तीन दिवसीय हड़ताल के पहले दिन गुरुवार को बायोमेट्रिक उपस्थिति के विरोध व अन्य मांगों को लेकर ओपीडी में मरीजों को नहीं देखा. सदर अस्पताल में पूर्वाह्न करीब 11 बजे तक डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों को देखा, लेकिन जब भासा के नेताओं ने हड़ताल की सूचना दी तो डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों को देखना बंद कर दिया.

सीवान. बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर सभी सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने तीन दिवसीय हड़ताल के पहले दिन गुरुवार को बायोमेट्रिक उपस्थिति के विरोध व अन्य मांगों को लेकर ओपीडी में मरीजों को नहीं देखा. सदर अस्पताल में पूर्वाह्न करीब 11 बजे तक डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों को देखा, लेकिन जब भासा के नेताओं ने हड़ताल की सूचना दी तो डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों को देखना बंद कर दिया. सदर अस्पताल के चाइल्ड ओपीडी में डॉ कालिका कुमार सिंह ने बच्चों को देखा एवं उनका इलाज किया. गुरुवार को लगभग 300 मरीजों को देखा गया. 11 बजे के बाद सामान्य ओपीडी के बंद होने से मरीजों को काफी परेशानी हुई. सीवान में सरकारी डॉक्टरों के हड़ताल को नेतृत्व करने वाले कोई भासा के अधिकारी नहीं मिले.

हड़ताली डॉक्टरों का कहना है कि शिवहर, गोपालगंज और मधुबनी जिले में जिलाधिकारी द्वारा बायोमेट्रिक के आधार पर कई महीनों से डॉक्टरों का वेतन अवरुद्ध कर दिया गया है और साथ ही साथ लगातार कई महीनों से राज्य भर के चिकित्सकों को प्रताड़ित किया जा रहा है. उससे पूरे बिहार के चिकित्सकों में बहुत ही आक्रोश व्याप्त है. साथ ही भासा के सुरक्षा, आवास, पर्याप्त मानव बल गृह जिला में पोस्टिंग, कार्य अवधि के निर्धारण सहित अन्य लंबित मांगों को लेकर अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है. अभी तक राज्य सरकार द्वारा आपातकालीन और 24X7 कार्यरत विभागों के लिए बायोमैट्रिक उपस्थिति का कोई आदेश निर्गत नहीं हुआ है. इसके बावजूद शिवहर जिले में चिकित्सकों को जिलाधिकारी द्वारा बैठक में भी अशिष्ट और अमर्यादित व्यवहार किए जाने से शिवहर जिलांतर्गत चिकित्सा अनिश्चितकालीन ओपीडी कार्य बहिष्कार जैसे कठोर निर्णय लिया गया.

अधीक्षक ने लाचार मरीजों का आपात कक्ष में कराया इलाज

सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ अनिल कुमार सिंह ने ओपीडी सेवा बाधित होने के कारण लाचार मरीजों का आपात कक्ष में डॉक्टरों द्वारा इलाज करवाया. कुछ लोगों का आवश्यक मेडिकल जांच थी, उसे भी विशेष व्यवस्था कर करवायी. कुत्ते काटने वाले मरीजों का उपचार आपात कक्ष में करवाकर उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन लगायी गयी. अधीक्षक डॉ अनिल ने बताया कि हड़ताल पर जाने के पहले डॉक्टरों द्वारा कोई सूचना अस्पताल प्रशासन को नहीं दी गयी थी. सुबह 11 बजे तक सदर अस्पताल के सभी ओपीडी में मरीजों को देखा गया. डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के बाद मरीजों का इस बात का ख्याल रखा गया कि उन्हें परेशानी नहीं हो. इमर्जेसी सेवा जैसे इमर्जेंसी विभाग, एसएनसीयू, लेबर रूम, ब्लड बैंक आदि का संचालन पूर्व की तरह ही हुआ. सिर्फ ओपीडी सेवा 11 बजे के बाद प्रभावित हुई.

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