बड़हरिया में फुटबॉल का रहा है गौरवशाली अतीत

बड़हरिया में खेल संस्कृति दशकों पुरानी है. खासकर फुटबॉल का पूरे इलाके जबरदस्त क्रेज रहा है.ऐसे तो बड़हरिया शुरु से विभिन्न खेलों का हब रहा है. एक समय ऐसा था जब बड़हरिया का नाम फुटबॉल की दीवानगी के लिए जाना जाता था. इसकी वजह है बड़हरिया के मैदानों से ढेरों खिलाड़ी निकले, जिसकी वजह से उस समय बड़हरिया को फुटबॉल की नर्सरी कहा जाता था.

प्रतिनिधि, बड़हरिया. बड़हरिया में खेल संस्कृति दशकों पुरानी है. खासकर फुटबॉल का पूरे इलाके जबरदस्त क्रेज रहा है.ऐसे तो बड़हरिया शुरु से विभिन्न खेलों का हब रहा है. एक समय ऐसा था जब बड़हरिया का नाम फुटबॉल की दीवानगी के लिए जाना जाता था. इसकी वजह है बड़हरिया के मैदानों से ढेरों खिलाड़ी निकले, जिसकी वजह से उस समय बड़हरिया को फुटबॉल की नर्सरी कहा जाता था. बड़हरिया में फुटबॉल का अपना एक स्वर्णिम इतिहास रहा है. 60 के दशक में पूरन प्रसाद, भरत प्रसाद, बच्चा प्रसाद, शौकत अली खान सरीखे फुटबॉलरों की तूती बोलती थी. पूरन प्रसाद आज भी जहां फुटबॉल का मैच होता है,वहां मौजूद होते हैं. खासकर 70 व 80 के दशक में फुटबॉल के एक से बढ़कर एक खिलाड़ी हुए, जिनके चलते पूरे बिहार,नेपाल, यूपी आदि में बड़हरिया का नाम रोशन किया था.फुटबॉल को बड़हरिया ने कई चमकते सितारे दिए हैं. जिनमें हरिहर प्रसाद यादव, हरेंद्र सिंह, हसीबुल्लाह अंसारी, एडवर्ड अंसारी, देवराज चौधरी, मो रशीद,अंशुमान सिंह, रामनरेश गिरि, एसएम अऊवाब, रघुनाथ सिंह,भरत राम,शंभू राम, शारदा पटेल,अली अकबर आदि का नाम शामिल है. 70 व 80 के दशक में बड़हरिया के खिलाड़ियों की तूती बोलती थी. बड़हरिया प्रखंड मुख्यालय के सटे गांव नूराछपरा के हरिहर प्रसाद यादव को महज 16 वर्ष की उम्र में 1973 में राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया था. उन्होंने कई बार नेशनल फुटबॉल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर जिले व राज्य का रोशन किया था. उन्होंने कई मौके पर अपने खेल कौशल से राष्ट्रीय फलक पर बिहार को गौरवान्वित किया. इन खिलाड़ियों के खेल का जादू कुछ ऐसा था कि इनका मुरीद हर कोई था. पूर्व फुटबॉलर मो रशीद बताते है कि जब बड़हरिया में खेल प्रतिभाओं अपना जलवा बिखेरना शुरु किया तो 1978 में बड़हरिया यूनाइटेड फुटबॉल क्लब का गठन हुआ.इसके खिलाड़ियों में मो अयूब, शारदा प्रसाद, मो शहाब,भरत राम, शफीकुर्रहमान, मो टुन्ना, शंभू राम, शम्सुल हक,हैदर अली,अरुण सिंह,अशोक सिंह, मुन्ना खान,शमीम खान आदि का नाम शुमार है. साथ ही,नागेन्द्र सिंह,मोहन दास, अमरजीत सिंह, सीता यादव,मदन सिंह आदि बड़हरिया यूनाइटेड टीम का हिस्सा रहे. जब फुटबॉल खिलाड़ी की संख्या बढ़ती गयी तो आजाद फुटबॉल कल्ब छक्का टोला बना. उसके बाद फुटबॉल टीम की जिम्मेदारी नेयाज अहमद,माशूक खान,दाउद खान,मो असलम, दिलेर, हरेराम यादव,जगदीश राम आदि पर आ गयी. हालांकि इन खिलाड़ियों ने विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश की. लेकिन पुराने दिन नहीं लौट सके. वहीं बिहार के चर्चित फुटबॉलर हरेंद्र सिंह बताते हैं कि उन्होंने उस वक्त की कई नामी गिरामी टीमों को धूल चटाकर कई सालों तक अपनी बादशाहत कायम रखी, उनमें बीएमपी पटना, रामनगर नेपाल, टाटा टेल्को, जमालपुर रेलवे, गया ताज कल्ब, सोनपुर रेलवे, बर्नपुर स्टील प्लांट, लखनऊ रेलवे, मऊ आजाद कल्ब, गोरखपुर, बनारस, बरहज, नौतनवां, अलीगढ़, बलेथरा नेपाल आदि शामिल थीं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By DEEPAK MISHRA

DEEPAK MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >