Siwan News : सीवान जिले में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने और मत्स्य किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सीवान चौर क्लस्टर विकास परियोजना को जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू हो गयी है. इसके लिए बसंतपुर, भगवानपुरहाट और गोरेयाकोठी प्रखंड का चयन किया गया है. तीनों प्रखंडों में अलग-अलग क्लस्टर बनाये जाएंगे. बाद में इन तीनों क्लस्टरों को मिलाकर एक समिति का गठन किया जाएगा. समिति के माध्यम से मत्स्य किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ, तकनीकी सुविधा और सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने की योजना है.
परियोजना के माध्यम से जिले में मछली उत्पादन को मौजूदा स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए उत्कृष्ट मछली उत्पादन करने वाले 35 किसानों का चयन किया जा चुका है. इन्हीं किसानों के माध्यम से समिति के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ायी जाएगी. बिहार सरकार की कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद समिति गठन का काम शुरू होगा. इसके बाद दूसरे मत्स्य किसानों को भी समिति से जोड़कर योजना का लाभ देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
समिति में 50 प्रतिशत महिलाएं और 50 प्रतिशत पुरुष होंगे
जिले में बनने वाली समिति में कुल 12 कार्यकारिणी सदस्य होंगे. इनमें 50 प्रतिशत महिलाएं और 50 प्रतिशत पुरुष शामिल होंगे. एससी, एसटी, एबीसी और ओबीसी वर्ग से दो-दो सदस्य तथा सामान्य वर्ग से छह सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान है. विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक मत्स्य किसानों को समूह के रूप में जोड़कर सामूहिक तरीके से मछली उत्पादन को बढ़ावा देना है.
अधिकारियों का मानना है कि किसान समूह में मिलकर उत्पादन करेंगे तो मछली पालन की लागत कम होगी और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने के साथ मुनाफा भी बढ़ेगा. समिति के माध्यम से किसानों को तकनीकी जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर भी जोर रहेगा.
195 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराने की मंजूरी
परियोजना के तहत भारत सरकार ने नाबार्ड के माध्यम से 195 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी है. अब विभाग बिहार सरकार की कैबिनेट से मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहा है. कैबिनेट की स्वीकृति के बाद राशि उपलब्ध कराने और किसानों को योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
विभाग के अनुसार इस राशि को मत्स्य पालन करने वाले किसानों को बिना ब्याज उपलब्ध कराने की योजना है. इससे किसानों को मछली पालन के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में आर्थिक मदद मिलेगी और उन्हें निजी स्तर पर महंगे ऋण लेने की जरूरत कम होगी.
275 हेक्टेयर में मछली पालन कर रहे 197 किसान
मत्स्य विभाग के सर्वे के अनुसार भगवानपुरहाट प्रखंड में 25 किसान करीब 60 हेक्टेयर, गोरेयाकोठी में 120 किसान करीब 150 हेक्टेयर और बसंतपुर में 52 किसान करीब 65 हेक्टेयर में बने तालाबों में मछली का उत्पादन कर रहे हैं.
इस तरह तीनों प्रखंडों में कुल 197 किसान करीब 275 हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य पालन कर रहे हैं. परियोजना के तहत इन किसानों को बेहतर तकनीकी और आर्थिक सुविधा उपलब्ध कराकर उत्पादन बढ़ाने के साथ उनकी आमदनी बढ़ाने की योजना है.
स्थानीय स्तर पर तैयार होगा मछली का बीज
परियोजना में हैचरी निर्माण पर भी विशेष जोर दिया जाएगा. इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मछली का बीज तैयार करना है. फिलहाल किसानों को दूसरे स्थानों से मछली का बीज मंगाना पड़ता है, जिससे परिवहन समेत अन्य खर्च बढ़ जाता है. स्थानीय स्तर पर बीज उपलब्ध होने से किसानों की लागत कम होगी.
इसके अलावा बायोफ्लॉक तालाब और टैंक तैयार करने की भी योजना है. मछलियों के लिए जरूरी दाना स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक तैयार कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा. विभाग का मानना है कि मछली का बीज और दाना स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से किसानों की उत्पादन लागत घटेगी और आमदनी बढ़ेगी.
दूसरे राज्यों से आने वाली मछलियों पर निर्भरता घटेगी
जिला मत्स्य पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य मत्स्य किसानों को समूह के रूप में जोड़कर उत्पादन बढ़ाना और उनकी लागत कम करना है. स्थानीय स्तर पर मत्स्य बीज और दाना उपलब्ध होने से किसानों को बाहर से सामग्री मंगाने में होने वाला अतिरिक्त खर्च बचेगा.
उन्होंने बताया कि मछली उत्पादन बढ़ने से जिले के लोगों को स्थानीय स्तर पर ताजी मछली उपलब्ध हो सकेगी. साथ ही दूसरे राज्यों से आने वाली मछलियों पर जिले की निर्भरता भी कम होगी. सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर विभाग का विशेष जोर है.
