EOU Raid Siwan : सीवान में आय से अधिक संपत्ति मामले में घिरे उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड़ की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. आर्थिक अपराध इकाई (EOU) अब सिर्फ उनकी चल-अचल संपत्तियों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी पता लगा रही है कि इतनी बड़ी संपत्ति अर्जित करने के पीछे किन लोगों और किस नेटवर्क की भूमिका रही. जांच एजेंसी बैंक खातों, निवेश, जमीन, वित्तीय लेन-देन और संभावित अवैध संबंधों की भी गहन पड़ताल कर रही है.
Siwan News : 202 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ा
सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में ईओयू को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड़ ने अपनी ज्ञात आय से करीब 201.97 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है. इसी आधार पर आर्थिक अपराध इकाई थाना, पटना में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. इसके बाद विशेष न्यायालय (निगरानी), पटना से तलाशी वारंट मिलने पर कार्रवाई शुरू की गई.
बैंक खाते, निवेश और शराब माफिया कनेक्शन की भी जांच
EOU अब बैंक खातों, निवेश, जमीन की खरीद-बिक्री, व्यवसायिक लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है. इसके साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि कहीं अवैध शराब कारोबार से जुड़े लोगों के साथ उनका किसी तरह का आर्थिक या व्यक्तिगत संबंध तो नहीं था. जांच एजेंसी उन लोगों और संस्थानों की भी जानकारी जुटा रही है, जिनके माध्यम से संपत्ति खरीदने या निवेश करने की आशंका है.
छह घंटे तक आवास और कार्यालय में चली छापेमारी
महादेवा रोड स्थित किराये के आवास और उत्पाद विभाग के कार्यालय में ईओयू की टीम ने करीब छह घंटे तक लगातार छापेमारी की. इस दौरान बैंक रिकॉर्ड, जमीन-जायदाद के दस्तावेज, निवेश संबंधी फाइलें और अन्य वित्तीय कागजातों की गहन जांच की गई. कार्रवाई के दौरान दोनों स्थानों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा. आसपास के लोगों की भीड़ भी जुटी रही और पूरे दिन इस कार्रवाई की चर्चा होती रही.
बंद मिला आवास, मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में खुलवाया गया ताला
जब ईओयू की टीम महादेवा रोड स्थित किराये के आवास पर पहुंची तो मुख्य दरवाजे पर ताला बंद मिला. बताया गया कि उत्पाद निरीक्षक अंकेश कुमार गोंड़ अवकाश लेकर अपने पैतृक घर गए हुए थे. इसके बाद मजिस्ट्रेट रविंद्र कुमार और जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के निदेशक मनीष कुमार की मौजूदगी में ताला खुलवाया गया. महादेवा थाना पुलिस की मौजूदगी में आवास के अंदर रखे दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े कागजातों की विस्तृत जांच की गई.
क्या पहले ही मिल गई थी कार्रवाई की भनक?
सूत्रों का दावा है कि अंकेश कुमार गोंड़ को उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे और संभावित छापेमारी की पहले ही जानकारी मिल गई थी. बताया जा रहा है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद वह छुट्टी लेकर अपने पैतृक घर चले गए थे. हालांकि, इस संबंध में ईओयू ने आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की है. जांच एजेंसी फिलहाल छापेमारी में मिले साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है.
2.36 करोड़ रुपये की संदिग्ध संपत्ति का मामला
आर्थिक अपराध इकाई की प्रारंभिक जांच में अंकेश कुमार गोंड़ के पास करीब 2.36 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्ति मिलने के साक्ष्य मिले, जो उनकी ज्ञात आय से 201.97 प्रतिशत अधिक बताई गई. इसी आधार पर 8 जुलाई को पटना में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. इसके बाद उनके पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई.
कार्यालय में प्रवेश पर लगी रोक, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
उत्पाद विभाग के कार्यालय में छापेमारी के दौरान आम लोगों और विभागीय कर्मचारियों के प्रवेश पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी. जांच टीम ने कार्यालय के दस्तावेज, कंप्यूटर रिकॉर्ड और अन्य अभिलेखों की बारीकी से जांच की. केवल जांच में शामिल अधिकारियों को ही अंदर जाने की अनुमति थी. कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और करीब छह घंटे बाद सामान्य कामकाज बहाल हो सका.
दस्तावेजों से खुल सकती हैं कई और परतें
ईओयू का मानना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के बाद मामले में कई नए खुलासे हो सकते हैं. जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आय से अधिक संपत्ति का वास्तविक स्रोत क्या था और क्या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क या शराब माफिया से जुड़े गठजोड़ की भूमिका थी. जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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