सदर अस्पताल की गंदी चादरों की नहीं हो रही है धुलाई

सदर अस्पताल के सभी वार्डों से करीब तीन दिनों से गंदे चादरों की धुलाई नहीं हो रही है.तीन दिनों का गंदा चादर सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों में पड़ा हुआ है.सदर अस्पताल की सफाई कार्य विभाग द्वारा जीविका को दिया गया है.जीविका द्वारा ही सदर अस्पताल में सफाई एवं चादरों की धुलाई की जा रही है.

प्रतिनिधि,सीवान.सदर अस्पताल के सभी वार्डों से करीब तीन दिनों से गंदे चादरों की धुलाई नहीं हो रही है.तीन दिनों का गंदा चादर सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों में पड़ा हुआ है.सदर अस्पताल की सफाई कार्य विभाग द्वारा जीविका को दिया गया है.जीविका द्वारा ही सदर अस्पताल में सफाई एवं चादरों की धुलाई की जा रही है.अगर दो तीन दिन ऐसे ही रहा तो मरीजों को बेड पर बिछाने के लिए चादर नहीं मिलेगा. चादर की धुलाई करने वाले जीविका के कर्मचारी किशोर बैठा का कहना है कि जीविका के पहले जिस एनजीओ को सफाई का कार्य मिला था,उस समय से सदर अस्पताल के गंदे चादरों की धुलाई का कार्य कर रहा है.उसने बताया कि उसे 16 हजार रुपये मिलते थे.उसने बताया कि अप्रैल महीने से जीविका कर्मचारी के रूप में धुलाई का कार्य कर रहा है.उसने कहा कि उसे मात्रा 8 हजार रुपये की दर से तीन माह का मानदेय दिया गया है.अधिकारियों द्वारा पूर्व की तरह 16 हजार रुपए प्रति माह देने की बात कही गई थी. मानदेय कम मिलने के कारण तीन दिनों से धुलाई का कार्य बंद कर दिया है.उसने बताया कि प्रतिदिन 125 चादरों की धुलाई करता है.इधर जीविका के क्षेत्रीय संयोजक अभिजीत शंकर से पूछे जाने पर पहले तो उन्होंने कहा कि धुलाई कर्मचारी छुट्टी पर गया है.लेकिन जब कर्मचारी के मानदेय की बात बताई गई तो उन्होंने बात बदल दिया.उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया कि फरवरी माह से अभी तक उनके बिल पर सदर अस्पताल के अधिकारियों द्वारा दस्तखत नहीं किया गया.बिल का भुगतान नहीं होने के कारण सफाई कार्य में लगे लगभग 90 कर्मचारियों का मानदेय किसी तरह मैनेज कर दिया जा रहा है.उन्होंने यह भी कहा कि धुलाई के लिए स्पेस एवं उपकरण को नहीं तक जीविका को हस्तगत नहीं किया गया.जिसके कारण चादरों की धुलाई मैनुअली कम जगह में किसी तरह करनी पड़ती है.उन्होंने कहा कि 8 हजार से अधिक चादर की धुलाई करने वाले कर्मचारी को मानदेय देने में असमर्थ है.चादरों की धुलाई की जवाबदेही जीविका की है.एक दो दिनों में चादरों की धुलाई नियमित होने लगेगी.

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Author: DEEPAK MISHRA

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