Siwan crematorium Remains Locked : सीवान नगर क्षेत्र के कंधवारा स्थित दाहा नदी तट के मुक्तिधाम श्मशान घाट में करीब 8 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से बना अत्याधुनिक शवदाह गृह सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच फंस गया है. नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी जहां शवदाह गृह के चालू होने और तीन पर्चियां कटने का दावा कर रही हैं, वहीं नगर उपसभापति किरण गुप्ता और स्थानीय वार्ड पार्षद रीता देवी का कहना है कि आज तक एक भी शव का यहां अंतिम संस्कार नहीं हुआ है और गेट पर हमेशा ताला लटका रहता है.मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना पार्ट-2 के तहत बने इस शवदाह गृह का उद्घाटन 22 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सीवान आगमन के दौरान किया गया था. इसके बावजूद शहरवासियों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार खुले आसमान के नीचे ही करना पड़ रहा है. इससे सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सुविधा धरातल पर क्यों नहीं उतर सकी.नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी नीलम श्वेता ने बताया कि नवनिर्मित शवदाह गृह चालू है. तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है तथा सामान्य और विद्युत दोनों माध्यमों से अंतिम संस्कार के लिए फिलहाल 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है. उनके अनुसार तीन पर्चियां भी कट चुकी हैं.उन्होंने बताया कि जल्द रेट रिवाइज किया जाएगा. हालांकि नगर उपसभापति किरण गुप्ता और वार्ड संख्या 22 की पार्षद रीता देवी ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया. दोनों का कहना है कि अभी तक शवदाह गृह में एक भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हुआ है. वार्ड पार्षद ने कहा कि शवदाह गृह के समीप नगर परिषद को सरकारी दर पर लकड़ी उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था करनी है. वहीं उपसभापति किरण गुप्ता ने बताया कि 18 अगस्त को सशक्त समिति की बैठक होगी, जिसमें शवदाह गृह को विधिवत चालू कराने को लेकर निर्णय लिया जाएगा. दो साल से अधिक समय में तैयार हुआ करोड़ों का प्रोजेक्ट शवदाह गृह के निर्माण का शिलान्यास तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने 4 अगस्त 2023 को किया था. निर्माण की जिम्मेदारी बुडको को दी गई, लेकिन करीब एक वर्ष तक काम बेहद धीमी गति से चलता रहा. 15 अक्टूबर 2024 को प्रभात खबर ने लोगों की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया. इसके बाद जिलाधिकारी ने निर्माण एजेंसी को तेजी से काम पूरा करने का निर्देश दिया. प्रशासनिक दबाव के बाद निर्माण कार्य में तेजी आई और जनवरी 2026 में भवन पूरी तरह तैयार हो गया। करोड़ों का भवन, लेकिन अंतिम संस्कार अब भी खुले में शहर के एकमात्र प्रमुख श्मशान घाट पर आज भी लोग गर्मी और बरसात में खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं. बारिश के दौरान जहां अंतिम संस्कार में परेशानी होती है, वहीं श्मशान परिसर स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी धुआं और अव्यवस्था झेलनी पड़ती है.करीब 14 बीघे में फैले सार्वजनिक श्मशान घाट की जमीन पर भी अतिक्रमण का आरोप है. बताया जाता है कि करीब एक चौथाई भूमि आसपास के लोगों ने अतिक्रमित कर ली है.इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से श्मशान घाट का क्षेत्र लगातार सिकुड़ता जा रहा है. विद्युत के दो और लकड़ी के चार शवदाह उपक्रम
आधुनिक मुक्तिधाम में महानगरों की तर्ज पर दो विद्युत संचालित और चार पारंपरिक लकड़ी संचालित शवदाह उपक्रम लगाए गए हैं.महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्नानघर बनाए गए हैं.सुरक्षा के लिए चारों तरफ चहारदीवारी भी की गई है.विद्युत शवदाह गृह में तकनीकी खराबी आने की स्थिति में लकड़ी वाले शवदाह उपक्रम का इस्तेमाल किया जा सकता है.लकड़ी से अंतिम संस्कार में अधिक समय लगता है और धुआं निकलने से प्रदूषण भी होता है, जबकि विद्युत शवदाह गृह में कम समय में अंतिम संस्कार संभव है और प्रदूषण भी काफी कम होता है. लकड़ी वाले शवदाह स्थल के लिए चबूतरे और शेड की व्यवस्था की गई है, ताकि बारिश में भी अंतिम संस्कार में परेशानी न हो. सवाल करोड़ों के खर्च पर, जवाबदेही किसकी? जब जनवरी 2026 में शवदाह गृह पूरी तरह तैयार हो चुका था और 22 जनवरी को उसका उद्घाटन भी हो गया, तो अगस्त तक लोगों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा? यदि नगर परिषद के अनुसार शवदाह गृह चालू है तो स्थानीय जनप्रतिनिधि इसके बंद होने का दावा क्यों कर रहे हैं? और यदि वास्तव में पर्चियां काटी गई हैं, तो उन पर्चियों के आधार पर कितने शवों का अंतिम संस्कार हुआ—इसका सार्वजनिक रिकॉर्ड क्यों नहीं है? करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई सुविधा अगर ताले में बंद रहे और लोग फिर भी खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करने को मजबूर हों, तो यह केवल व्यवस्था की खामी नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल है.
