सीवान: 12 साल बाद ग्राहक परिवार को मिला इंसाफ, सीवान उपभोक्ता आयोग ने सेंट्रल बैंक को 64 हजार रुपये से अधिक भुगतान का दिया आदेश

12 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सीवान उपभोक्ता आयोग ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खिलाफ ग्राहक परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया है. बैंक को 49 हजार रुपये ब्याज सहित, 10 हजार मुआवजा और 5 हजार वाद खर्च देने का आदेश दिया गया है.

सीवान: (विवेक कुमार सिंह) करीब 12 वर्ष तक चली कानूनी लड़ाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग, सीवान ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खिलाफ ग्राहक के परिवार के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. आयोग ने बैंक को 49 हजार रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने, 10 हजार रुपये मुआवजा तथा 5 हजार रुपये वाद खर्च देने का आदेश दिया है.

2014 में जमा किए थे 49 हजार रुपये

मामला सीवान शहर निवासी स्वर्गीय चंद्रकला देवी से जुड़ा है. उन्होंने 18 फरवरी 2014 को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में 49 हजार रुपये जमा किए थे. बैंक के कैशियर ने उन्हें राशि जमा करने की रसीद भी दी थी.

हालांकि, 22 अप्रैल 2014 को जब उनके पति पासबुक अपडेट कराने बैंक पहुंचे तो पता चला कि जमा की गई राशि खाते के लेजर में दर्ज ही नहीं हुई थी.

शिकायत के बाद भी नहीं मिला समाधान

परिजनों के अनुसार, चंद्रकला देवी ने कई बार बैंक से शिकायत की और कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. इसके बाद वर्ष 2014 में उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया.

राज्य और राष्ट्रीय आयोग तक पहुंचा मामला

शुरुआत में बैंक आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद एकपक्षीय आदेश पारित हुआ. बैंक ने इस आदेश के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली. इसके बाद मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नई दिल्ली पहुंचा.

सुनवाई के दौरान चंद्रकला देवी का निधन हो गया, जिसके बाद उनके पति और बच्चों को वादी बनाया गया. राष्ट्रीय आयोग ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए जिला उपभोक्ता आयोग, सीवान भेज दिया.

बैंक की सेवा में पाई गई कमी

दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जयराम प्रसाद और सदस्य मनमोहन कुमार ने माना कि बैंक की सेवा में स्पष्ट कमी (Deficiency in Service) रही है.

आयोग ने बैंक को आदेश दिया कि वह 49 हजार रुपये 23 जून 2023 से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वादियों को 60 दिनों के भीतर भुगतान करे. साथ ही आर्थिक, शारीरिक और मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा तथा 5 हजार रुपये वाद खर्च भी अदा करे.

आदेश का पालन नहीं करने पर बढ़ेगा ब्याज

आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि बैंक 60 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसे छह प्रतिशत के स्थान पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा. इसके अलावा आदेश की अवहेलना होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत बैंक के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.

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By Prabhat khabar news desk

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