भगवानपुर हाट प्रखंड क्षेत्र के सहसरांव गांव स्थित युवा संत नागमणि के निवास पर आयोजित सत्संग में भागवत कथा वाचक आचार्य गोविंद महाराज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश दिया. सत्संग को संबोधित करते हुए आचार्य गोविंद जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा आत्मा और परमात्मा के मिलन की कथा है. उन्होंने कहा कि समस्त देवी-देवता सहित पूरी सृष्टि काल के अधीन है, इसलिए केवल उनकी उपासना से जीव को शाश्वत मुक्ति की प्राप्ति नहीं होती. उन्होंने भागवत गीता के नवें अध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि देवी-देवताओं की पूजा अज्ञानवश की जाती है. आत्मा के कल्याण के लिए क्षर और अक्षर ब्रह्म से परे उत्तम पुरुष अक्षरातीत परमात्मा की आराधना आवश्यक है, जो सभी आत्माओं के स्वामी हैं. उन्होंने कहा कि माया में फंसा जीव कर्मकांड और बाहरी आडंबर के सहारे भवसागर पार करना चाहता है, लेकिन इससे जन्म-मृत्यु का चक्र समाप्त नहीं होता. आत्मा के उद्धार के इच्छुक लोगों को कर्मकांड, श्राद्ध और दिखावटी पूजा-पाठ में उलझने के बजाय भागवत कथा के माध्यम से ज्ञान प्राप्त कर परमात्मा की अनन्य प्रेममयी भक्ति करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति के लिए मनुष्य का खान-पान, आचरण और जीवन पवित्र होना चाहिए. कार्यक्रम के दौरान संजय प्रसाद साहेब ने आचार्य गोविंद जी महाराज को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया. इस अवसर पर विकास कुमार यादव, एलआईसी के डीओ विनोद कुमार, राजदेव साह, अशोक सिंह मेघनाथ कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.
आत्मा और परमात्मा की कथा है भागवत कथा : आचार्य गोविंद महाराज
आचार्य गोविंद महाराज ने कहा कि भागवत कथा आत्मा और परमात्मा के मिलन की कथा है। कर्मकांड से ऊपर उठकर परमात्मा की भक्ति ही मोक्ष का एकमात्र मार्ग है।

फोटो :आचार्य गोविंद जी महाराज कों सम्मानित करते हुये | Prabhat Khabar Network