एआरटी सेंटर में छह माह से डॉक्टर नहीं

सदर अस्पताल स्थित एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) द्वारा एचआइवी संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए संचालित व्यवस्था पिछले छह माह से डॉक्टर के अभाव में चरमराई हुई है.प्रशिक्षित सीनियर मेडिकल ऑफिसर का पद रिक्त रहने के कारण यहां आने वाले नए और पुराने मरीज बिना डॉक्टर की सीधी सलाह के ही दवा लेने को मजबूर हैं.

प्रतिनिधि,सीवान. सदर अस्पताल स्थित एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) द्वारा एचआइवी संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए संचालित व्यवस्था पिछले छह माह से डॉक्टर के अभाव में चरमराई हुई है.प्रशिक्षित सीनियर मेडिकल ऑफिसर का पद रिक्त रहने के कारण यहां आने वाले नए और पुराने मरीज बिना डॉक्टर की सीधी सलाह के ही दवा लेने को मजबूर हैं. जानकारी के अनुसार, सेंटर पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को दवा तो उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन यदि किसी को अधिक समस्या होती है तो गोपालगंज या छपरा एआरटी सेंटर के डॉक्टरों से फोन पर संपर्क कर उपचार संबंधी सलाह ली जाती है. एचआइवी के अलावा अन्य बीमारी होने पर मरीजों को सदर अस्पताल के ओपीडी में भेजा जाता है और हालत गंभीर होने पर पटना रेफर करना पड़ता है। बेसलाइन टेस्ट और वायरल लोड रिपोर्ट आधारित दवा बदलने में सबसे ज्यादा दिक्कत एआरटी सेंटर में सीडी-4 टेस्ट की जगह अब वायरल लोड जांच शुरू की गई है. लेकिन सीनियर मेडिकल ऑफिसर न होने के कारण नए मरीजों का बेसलाइन टेस्ट और पुराने मरीजों की वायरल लोड रिपोर्ट के आधार पर एआरटी दवा बदलने में बड़ी कठिनाई सामने आ रही है.नियमों के अनुसार, एचआइवी उपचार का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टर ही मरीज की जांच रिपोर्ट देखकर दवा बदलने का निर्णय ले सकते हैं, जबकि पिछले छह महीने से यह जिम्मेदारी मजबूरी में स्वास्थ्यकर्मी निभा रहे हैं. 3403 एचआइवी मरीज निर्भर, हर छह माह जांच जरूरी सीवान एआरटी सेंटर से वर्तमान में लगभग 3403 एचआईवी संक्रमित मरीज दवा ले रहे हैं.लगभग एक साल में इलाज के दौरान लगभग 42 मरीजों ने एयरटी की दवा खानी छोड़ दी है.जबकि इलाज के दौरान 14 मरीजों की मौत की मौत हो गई है.जनवरी से लेकर अब तक जांच में लगभग 362 एचआइवी के नए मरीज मिले हैं.इनमें 36 मरीज ऐसे हैं जिन्हें एचआईवी के साथ टीबी बीमारी है.हर छह महीने पर इन सभी का फॉलोअप वायरल लोड टेस्ट अनिवार्य है.रिपोर्ट आने के बाद जरूरत के अनुसार दवा की नई लाइन शुरू की जाती है, पर डॉक्टर न होने से यह प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.एआरटी कर्मियों का कहना है कि बिना डॉक्टर के दवा प्रबंधन करना जोखिम भरा है और कई बार मरीजों की स्थिति को समझने में भी दिक्कत होती है.स्थानीय लोगों और मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग से जल्द से जल्द प्रशिक्षित सीनियर मेडिकल ऑफिसर की तैनाती की मांग की है, ताकि एआरटी सेंटर की सेवाएं सुचारु हो सकें और मरीजों को राहत मिल सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: DEEPAK MISHRA

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >