Arhar Cultivation: आत्मनिर्भर दलहन योजना के तहत अरहर की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रथम सत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसके तहत बड़हरिया नगर पंचायत के खानपुर गांव और सदरपुर पंचायत के सदरपुर गांव में सहायक तकनीकी प्रबंधक के नेतृत्व में किसानों को अरहर की वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी गयी.
दलहन फसलों की खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है
प्रशिक्षण के दौरान एटीएम ने कहा कि किसानों के लिए दलहन फसलों की खेती करना काफी महत्वपूर्ण है. इनमें अरहर की खेती का विशेष महत्व है. दलहनी फसलों की खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और मिट्टी की संरचना में सुधार होता है. साथ ही दलहनी फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करने में भी सहायक होती हैं.
कम खाद और पानी में की जा सकती है अरहर की खेती
उन्होंने किसानों को अरहर की खेती के फायदे बताते हुए कहा कि अरहर की खेती ऊपरी जमीन पर आसानी से की जा सकती है. इसमें अन्य कई फसलों की अपेक्षा खाद और पानी की आवश्यकता कम होती है. उन्होंने किसानों से अपने खेतों में अरहर की खेती को बढ़ावा देने की अपील की.
बिहार कृषि ऐप और ड्रोन से छिड़काव की दी जानकारी
प्रशिक्षण में किसानों को बिहार कृषि ऐप, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि ड्रोन से फसलों में छिड़काव समेत कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गयी. साथ ही योजनाओं का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया.
41 किसानों को बिहार कृषि ऐप से जोड़ा गया
इस दौरान बड़हरिया नगर पंचायत के 18 और सदरपुर पंचायत के 23 किसानों को बिहार कृषि ऐप से जोड़ा गया. प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे.
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