सीवान: राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत दरौली प्रखंड में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन से टीबी मरीजों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. गुरुवार को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की देखरेख में दोन गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में करीब 100 लोगों की स्क्रीनिंग की गई.
एआई तकनीक से होगी टीबी की शीघ्र पहचान
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अत्याधुनिक हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के जरिए गांव-गांव जाकर लोगों के छाती का एक्स-रे किया जा रहा है. एआई तकनीक की मदद से संभावित टीबी मरीजों की प्रारंभिक पहचान की जा रही है, ताकि समय पर पुष्टि जांच कर उपचार शुरू किया जा सके.
एक ही शिविर में कई बीमारियों की जांच
स्वास्थ्य शिविर में टीबी स्क्रीनिंग के साथ-साथ एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस की भी जांच की गई. इससे ग्रामीणों को एक ही स्थान पर कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला.
नौ गांवों में 44 हजार से अधिक लोगों की होगी स्क्रीनिंग
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि बुधवार को दरौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित शिविर में 56 लोगों की स्क्रीनिंग की गई थी. पूरे अभियान के तहत दरौली प्रखंड के नौ गांवों में 44,075 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
पीएचसी में स्थायी एक्स-रे सुविधा का अभाव
अभियान के दौरान यह भी सामने आया कि दरौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी एक्स-रे मशीन उपलब्ध नहीं है. इसके कारण टीबी के संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए विशेष शिविरों और मोबाइल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन पर निर्भर रहना पड़ता है.
स्थायी सुविधा मिलने से अभियान को मिलेगी गति
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि दरौली पीएचसी में स्थायी एक्स-रे सुविधा उपलब्ध हो जाए तो टीबी मरीजों की पहचान, जांच और उपचार की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी. इससे टीबी मुक्त भारत अभियान को भी नई गति मिलेगी.
