Jai Prakash University : सीवान में जयप्रकाश विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित राजकीय डिग्री कॉलेजों में प्रतिनियुक्त प्राध्यापकों को अब उनके मूल महाविद्यालय में वापस भेज दिया गया है. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार बाजपेयी के आदेश पर कुलसचिव प्रो. नारायण दास ने बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. अधिसूचना में संबंधित सभी प्राध्यापकों को अपने मूल अथवा पैतृक महाविद्यालय में योगदान करने का निर्देश दिया गया है.
विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले राजकीय डिग्री कॉलेजों में लंबे समय से विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों के प्राध्यापकों को प्रतिनियुक्त किया गया था. अब विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्देश के बाद कुल 18 प्रतिनियुक्त प्राध्यापकों को उनके मूल महाविद्यालय में वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की गयी है.
सीवान के 10 राजकीय डिग्री कॉलेज भी आदेश के दायरे में
सीवान जिले में संचालित दस राजकीय डिग्री कॉलेजों में प्रतिनियुक्त प्राध्यापकों को भी इस आदेश के तहत उनके मूल महाविद्यालय में वापस किया गया है. राजकीय डिग्री कॉलेज हुसैनगंज में प्रतिनियुक्त राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. धनंजय यादव को उनके पैतृक महाविद्यालय डीएवी पीजी कॉलेज में योगदान करने का निर्देश दिया गया है.
इसी तरह राजकीय डिग्री कॉलेज नौतन में प्रतिनियुक्त डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह को भी डीएवी पीजी कॉलेज में वापस किया गया है. राजकीय डिग्री कॉलेज दरौली में प्रतिनियुक्त प्रवीण कुमार को भी डीएवी पीजी कॉलेज में योगदान करने का निर्देश दिया गया है.
दरौंदा कॉलेज की प्राध्यापिका भी मूल कॉलेज लौटेंगी
राजकीय डिग्री कॉलेज दरौंदा में प्रतिनियुक्त डॉ. अर्चना कुमारी को उनके मूल महाविद्यालय विद्या भवन महिला कॉलेज वापस किया गया है. इसके अलावा जिले के अन्य राजकीय डिग्री कॉलेजों में प्रतिनियुक्त प्राध्यापकों को भी उनके संबंधित पैतृक महाविद्यालय में योगदान करने के लिए निर्देशित किया गया है.
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अब सभी संबंधित प्राध्यापकों को अपने मूल महाविद्यालय में योगदान करना होगा. इस फैसले के तहत 18 प्राध्यापकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें उनके मूल अंगीभूत महाविद्यालयों में वापस भेजा गया है.
मूल कॉलेजों में बढ़ेगी शिक्षकों की उपलब्धता
प्रतिनियुक्त प्राध्यापकों के अपने मूल महाविद्यालयों में लौटने से वहां शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी. इससे संबंधित कॉलेजों में कक्षाओं के नियमित संचालन और विद्यार्थियों की पढ़ाई में मदद मिलने की उम्मीद है. साथ ही शैक्षणिक गतिविधियों को संचालित करने में भी कॉलेज प्रशासन को सहूलियत होगी.
