गुठनी : वर्ष 2013 में गुठनी स्थित केनरा बैंक में सूबे सबसे बड़ी चोरी की घटना हुई थी. इस घटना को स्थानीय लोगों की मदद से अंतर प्रांतीय बैंक चोर गिरोह के सदस्यों ने अंजाम दिया था.
तब से पुलिस फरार चले सरगना के मुख्य सदस्य मुंबई से शातिर चोर राज व गेटिया के साथ पड़ोसी यूपी के देवरिया जिले के रामगुलाम टोला निवासी दुर्गा बांसफोर की गिरफ्तारी में पुलिस लगी थी. करीब छह वर्ष बाद पुलिस को सूचना मिली की दुर्गा बांसफोर इन दिनों घर पर रह रहा है. इसके बाद पुलिस ने देवरिया पुलिस के सहयोग से सोमवार को गिरफ्तार कर लिया.
इसके बाद उससे देवरिया में पूछताछ की. पूछताछ के क्रम में दुर्गा ने कई राज उगले. पुलिस के अनुसार केनरा बैंक चोरी की घटना में दुर्गा की अहम भूमिका थी. उसी ने मुंबई से शातिर चोर राज व गेटिया को बुलाया था. यही नहीं भागने के लिए उसी ने ही वाहन की भी व्यवस्था की थी. फिलहाल पुलिस राज व गेटिया के बारे में दुर्गा से और जानकारी ले रही है. पुलिस उसे शीघ्र गिरफ्तार भी कर लेगी.
थानाध्यक्ष मनोरंजन कुमार ने बताया कि केनरा बैंक में मुख्य सेटर की भूमिका निभाने वाले फरार बैंक कर्मी दुर्गा बांसफोर के अपने घर देवरिया में रहने लगा है. मंगलवार शाम थानाध्यक्ष अपनी टीम लेकर देवरिया पहुंचे. इसके बाद देवरिया पुलिस के सहयोग से रामगुलाम टोला में छापेमारी कर दुर्गा को गिरफ्तार कर लिया. थानाध्यक्ष ने बताया दुर्गा ने कबूल किया है कि केनरा बैंक चोरी में मुख्य सेटिंग की थी.
उसने ही स्कार्पियो किराया पर लिया था और महाराष्ट्र के मुंबई के राज व गेटिया को बुलाकर घटना को अंजाम दिया था. दुर्गा ने गुठनी के स्थानीय जनप्रतिनिधि का भी नाम बताया है जो घटना में मदद किया और हिस्से की रकम ली थी. हालांकि वह जनप्रतिनिधि इस मामले में जेल जा चुका है और जमानत पर बाहर है.
दुर्गा यूपी देवरिया रामगुलाम टोला निवासी माताबिन बांसफोर का पुत्र है और कई बैंक चोरी की घटनाओं की सेटिंग कराने में शामिल रहा है. दुर्गा घटना के समय देवरिया स्थित पंजाब नेशनल बैंक का चतुर्थवर्गीय कर्मचारी था जो घटना के बाद फरार रहने लगा और नौकरी गंवानी पड़ी थी. दुर्गा को गुठनी पुलिस ने बुधवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
55.35 लाख की हुई थी चोरी
विदित हो कि दिसंबर 2013 में गुठनी थाना के ठीक सामने स्थित केनरा बैंक से 55 लाख 35 हजार 587 रुपये की चोरी हुई थी. यह घटना बिहार की सबसे बड़ी बैंक चोरी की घटना थी. इस घटना को तत्कालीन एसडीपीओ विवेकानंद ने काफी गंभीरता से लिया और जांच शुरू की.मोबाइल लोकेशन के आधार पर इस कांड का उद्द्भेदन हो गया और मुख्य चोरों के सहयोगियों की गिरफ्तारी हो गयी.
