सीवान : सीवान जिला इन दिनों बांग्लादेशियों व अपराधी किस्म के लोगों को छिपने के लिए एक सेफ जोन बन गया है. प्रशासन के नाक के नीचे बांग्लादेशी नागरिक आधार व पहचान पत्र बनवाकर खुलेआम फेरी या होटलों में मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं. होटलों में काम करनेवाले बांग्लादेशी लोगों को सस्ता मजदूर मिल जा रहा है.
बांग्लादेशियों के छिपने का सेफ जोन बना सीवान
सीवान : सीवान जिला इन दिनों बांग्लादेशियों व अपराधी किस्म के लोगों को छिपने के लिए एक सेफ जोन बन गया है. प्रशासन के नाक के नीचे बांग्लादेशी नागरिक आधार व पहचान पत्र बनवाकर खुलेआम फेरी या होटलों में मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं. होटलों में काम करनेवाले बांग्लादेशी लोगों को सस्ता […]

इसलिए वे ऐसे लोगों को फर्जी तरीके से आधार व पहचान पत्र बनवाने में भी मदद कर रहे हैं. ऐसे लोगों से जब कोई पासपोर्ट मांगता है तो वे अपना फर्जी आधार कार्ड दिखाते हैं. करीब एक दशक पहले सीवान आये बांग्लादेशी तो अब पूर्ण रूप से सीवान के नागरिक बन चुके हैं.
2016 में नगर थाने की पुलिस ने जब कुछ बांग्लादेशी नागरिकों को चोरी के सामान के साथ पकड़ा तो पुलिस के कान खड़े हो गये. तत्कालीन एसपी सौरव कुमार साह ने सख्त कदम उठाते हुए मकान मालिकों को निर्देश दिया था कि किरायेदारों के चरित्र सत्यापन थाने से कराने के बाद ही अपने घरों को भाड़े पर उन्हें दे.
लेकिन एसपी के सख्त निर्देश के बाद न तो मकान मालिकों ने इस संबंध में कोई दिलचस्पी दिखायी और न शहरी क्षेत्र के थानों ने अपने क्षेत्र में रहनेवाले किरायेदारों की सूची बनायी. शहरी क्षेत्र में आये दिन अापराधिक घटनाएं हो रही हैं, लेकिन पुलिस अपराधियों को पकड़ पाने में कामयाब नहीं हो रही है. अपराध करने के बाद अपराधी शहरी क्षेत्रों में ही छिप जाते है.
पुलिस के पास इस संबंध में कोई सूचना नहीं होने के कारण कुछ नहीं कर पाती है. पुलिस का मानना था कि प्राय: ऐसा देखा जाता है कि जिले के शहरी क्षेत्रों में किराये पर रहने वाले किरायेदारों का सत्यापन नहीं कराया जाता है तथा उनके द्वारा किसी अपराध को अंजाम देकर फरार हो जाने के उपरांत उनकी गिरफ्तारी में काफी कठिनाई होती है.
आधार कार्ड व पहचान पत्र बनवाकर हो गये हैं सीवान के निवासी
शहरी क्षेत्रों के थानों को कराना था किरायेदारों का सत्यापन
शहरी क्षेत्र के मैरवा, नगर, महादेवा, मुफस्सिल, सराय व महाराजगंज को आदेश दिया गया था कि अपने क्षेत्र में रहनेवाले किरायेदारों की सूची तैयार कर उनके पैतृक जिले से चरित्र सत्यापन कराने के लिए प्रस्ताव समर्पित करें. साथ ही थानेदारों को अपने थाना क्षेत्र में पड़नेवाले सभी मकान मालिकों को यह अवगत कराना था कि वे चरित्र सत्यापन के उपरांत ही किरायेदारों को किराये पर रहने के लिए अनुमति दें.
अगर उनके द्वारा बगैर चरित्र सत्यापन के किरायेदार को रखा जाता है और किसी भी प्रकार का अपराध किरायेदार के द्वारा किया जाता है तो उसमें मकान मालिक की भी सहभागिता मानी जायेगी एवं उन्हें भी सह अभियुक्त बनाकर कार्रवाई की जायेगी.
जिले के सभी मकान मालिक जो अपने मकान में पूर्व से किरायेदार रखे हुए हैं अपने मकान का लोकेशन, मकान के कमरों की संख्या, रहनेवाले किरायेदार का नाम पता (किरायेदार सत्यापन फाॅर्म में) थाने में उपलब्ध करा देना था. मकान मालिकों द्वारा समर्पित सत्यापन प्रतिवेदन को डाटा बेस तैयार कर ऑनलाइन किया जाना था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.
क्या कहते हैं जिम्मेदार
किसी भी मकान मालिक को किरायेदार रखने के पहले उसका सत्यापन स्थानीय थाने से कराना आवश्यक है. पुलिस जल्द ही इस मामले में भाड़े के मकानों में किराये पर रहनेवाले लोगों का चरित्र सत्यापन करायेगी. अगर किसी व्यक्ति को कोई संदेहास्पद व्यक्ति दिखाई देता है तो वह स्थानीय थाने का सूचित कर सकता है. पुलिस अपने स्तर से उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगी.
नवीन चंद्र झा, पुलिस अधीक्षक, सीवान
क्या कहते हैं जिम्मेदार
किसी भी मकान मालिक को किरायेदार रखने के पहले उसका सत्यापन स्थानीय थाने से कराना आवश्यक है. पुलिस जल्द ही इस मामले में भाड़े के मकानों में किराये पर रहनेवाले लोगों का चरित्र सत्यापन करायेगी. अगर किसी व्यक्ति को कोई संदेहास्पद व्यक्ति दिखाई देता है तो वह स्थानीय थाने का सूचित कर सकता है. पुलिस अपने स्तर से उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगी.
नवीन चंद्र झा, पुलिस अधीक्षक, सीवान