निष्क्रिय 3.81 लाख खातों में पड़े 120 करोड़ से अधिक की राशि ग्राहकों को होगी वापस

रिजर्व बैंक के निर्देश पर बैंकों ने लाभुकों से की पोर्टल पर दावा करने की अपील

सीवान . बैंकों में वर्षों से निष्क्रिय पड़े खातों में जमा करोड़ों रुपये अब खाताधारकों या उनके वैध उत्तराधिकारियों को मिल सकेंगे. दस वर्ष या उससे अधिक समय से बिना किसी लेन-देन के पड़े खातों को पुनः सक्रिय करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने व्यापक पहल शुरू की है. इसी कड़ी में देश के अन्य जिलों के साथ सीवान में भी निष्क्रिय खातों की पहचान की जा रही है, जिनमें बड़ी राशि जमा है, लेकिन खाताधारकों को इसकी जानकारी तक नहीं है.

आंकड़ों के अनुसार जिले के विभिन्न बैंकों में दस वर्ष से अधिक समय से निष्क्रिय 3 लाख 81 हजार 858 खाते हैं. इन खातों में कुल 120.04 करोड़ रुपये की राशि जमा है. बैंक अधिकारियों के मुताबिक अधिकतर खाताधारकों को न तो अपने खाते की स्थिति की जानकारी है और न ही जमा धनराशि का पता. कई मामलों में खाताधारकों की मृत्यु के बाद उनके परिजनों को भी खातों की सूचना नहीं मिल सकी, जिससे राशि वर्षों से निष्क्रिय पड़ी रही.

उद्गम पोर्टल से मिलेगी निष्क्रिय खातों की जानकारी

जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक (एलडीएम) अमित कुमार झा ने बताया कि आरबीआई द्वारा शुरू किए गए उद्गम पोर्टल के माध्यम से जमाकर्ता या उनके परिजन देश के किसी भी बैंक में मौजूद निष्क्रिय या लावारिस खातों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. पोर्टल पर आवश्यक विवरण दर्ज कर यह देखा जा सकता है कि किसी व्यक्ति के नाम से कहीं कोई निष्क्रिय खाता या जमा राशि है या नहीं. इसके बाद संबंधित बैंक शाखा से संपर्क कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत राशि प्राप्त की जा सकती है.

एलडीएम ने बताया कि यदि किसी खाते में दस वर्ष या उससे अधिक समय तक कोई लेन-देन नहीं होता है, तो वह खाता आरबीआई के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में स्थानांतरित कर दिया जाता है. हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि खाताधारक की राशि समाप्त हो जाती है. खाताधारक या उनके वैध दावेदार निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी जमा राशि वापस प्राप्त कर सकते हैं.

बैंक शाखाओं में अलग से बने सहायता काउंटर

‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ योजना के तहत निष्क्रिय खातों में जमा धन को वास्तविक लाभुकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है. इसी उद्देश्य से जिले की बैंक शाखाओं में अलग से सहायता काउंटर स्थापित किए गए हैं, जहां लोगों को योजना, पोर्टल और दावा प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी जा रही है. बैंक प्रबंधकों को निर्देश दिए गए हैं कि दावेदारों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाए और किसी भी प्रकार की अनावश्यक अड़चन न डाली जाए.

31 मार्च तक किया जा सकेगा दावा

जानकारी के अनुसार जिन खातों में नॉमिनी दर्ज हैं, वहां नामांकित व्यक्ति आधार कार्ड के माध्यम से आसानी से दावा कर सकते हैं. वहीं, जिन मामलों में नामांकन नहीं है, वहां अन्य वैध दावेदार शपथ-पत्र के आधार पर राशि वापसी के लिए आवेदन कर सकते हैं. ऐसे सभी दावे 31 मार्च 2026 तक संबंधित बैंकों के पोर्टल पर किए जा सकते हैं.

आरबीआइ और केंद्र सरकार की इस पहल से सीवान जिले के हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. वर्षों से बैंकों में निष्क्रिय पड़ी करोड़ों रुपये की राशि अब लोगों तक पहुंचेगी, जिससे आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ वित्तीय जागरूकता और विश्वास भी मजबूत होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >