Surandh Temple News: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सुरसंड का बाबा वाल्मीकेश्वर नाथ महादेव मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहाँ स्थापित गोकर्ण के आकार के एकाक्षी शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
राजा जनक काल से जुड़ी पौराणिक मान्यता
पंडित विजय कांत झा के अनुसार, इस शिवलिंग की स्थापना राजा जनक के पूर्व के राजाओं के काल में भगवान शिव ने स्वयं की थी.
- पौराणिक कथा: इस निर्जन वन में एक महर्षि तपस्या में लीन थे, जिन्हें दीमक ने ढका हुआ था. जंगल विहार पर आई एक राजकुमारी ने अनजाने में उन्हें कांटा चुभो दिया, जिससे पूरा राज्य संकट में पड़ गया.
- महर्षि की सेवा: राजा ने क्षमा याचना करते हुए अपनी राजकुमारी को महर्षि की सेवा में सौंप दिया.
- शिव दर्शन: तपस्या पूर्ण होने पर भगवान शिव व माता पार्वती ने दर्शन दिए और महर्षि के अवशेष को लिंग का आकार देकर 'वाल्मीकेश्वर नाथ' नाम दिया.
सावन की सोमवारी पर 50 हजार से अधिक श्रद्धालु करते हैं जलाभिषेक
मंदिर की ख्याति 70 के दशक के बाद तेजी से बढ़ी और आज यह सुविधाओं से सुसज्जित है.
- विशाल भीड़: सावन के प्रत्येक सोमवार को स्थानीय और सीमावर्ती नेपाल से 50 हजार से अधिक श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं.
- शिव सेवा समिति: पूर्व मुखिया शोभित राउत और समिति के सदस्यों द्वारा मंदिर परिसर का चौतरफा विकास कराया गया है.
- भव्य शिव बरात: महाशिवरात्रि पर हर साल भव्य शिव बरात और शिव-पार्वती विवाह का सांस्कृतिक आयोजन होता है.
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