Sitamarhi News: कला-संगम एवं पं. चंद्रशेखर धर शुक्ल साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को माधोपुर रौशन, भीसा में 'मत भूलें अपनी माटी को' कार्यक्रम के तहत बच्चों एवं युवाओं के बीच साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कला-संगम के अध्यक्ष एवं गीतकार गीतेश ने की, जबकि संचालन शिक्षाविद् राजू कुमार ने किया.
मातृभाषा और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का आह्वान
परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि आज की पीढ़ी अंग्रेजी गिनती और महीनों को तो आसानी से याद रखती है, लेकिन हिंदी गिनती तथा भारतीय पंचांग के महीनों से दूर होती जा रही है. उन्होंने इसे चिंता का विषय बताते हुए कहा कि अपनी संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के लिए बच्चों और युवाओं के बीच लगातार संवाद स्थापित करना जरूरी है.
बच्चों को भेंट की गई हिंदी गिनती और महीनों की हस्तलिखित प्रति
कार्यक्रम के दौरान इंग्लिश मीडियम में अध्ययनरत दिव्यांशु राज, मयंक कुमार, तृषा कुमारी, रिद्धि कुमारी सहित अन्य बच्चों को साहित्यानुरागी अधिवक्ता पंकज कुमार ने हिंदी गिनती और हिंदी महीनों की हस्तलिखित प्रति भेंट की.
कवि गोष्ठी में गूंजी संस्कृति और मातृभाषा की आवाज
द्वितीय सत्र में आयोजित कवि गोष्ठी का शुभारंभ गीतकार गीतेश ने अपनी रचना "आप वाकिफ हो रहे हैं आसमां की उड़ान से, लेकिन कटते जा रहे हैं अपने खेत और खलिहान से" के पाठ से किया.
युवा कवि कृष्णनंदन लक्ष्य ने "हिंदी हमारे पास है, इसमें गजब की खुशबू और मिठास है" तथा सुकेश सत्यांश ने "बातें समझनी होगी युवा पीढ़ी को, हमें महफूज रखनी है अपनी संस्कृति की सीढ़ी को" शीर्षक रचनाओं के माध्यम से मातृभाषा और संस्कृति संरक्षण का संदेश दिया.
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