सीतामढ़ी/पुपरी. सीतामढ़ी व पुपरी शहर समेत संपूर्ण जिले में क्षेत्र में पिछले ग्यारह दिन से निरंतर हड्डी को जमा देने वाली ठंड का सिलसिला जारी है. रविवार को भी आसमान में घने कोहरे छाये रहने के कारण दिनभर धूप नहीं निकली. दिन में भी फिजा में अंधेरा छाया रहा. लोगों के पास अलाव के पास बैठकर दिन गुजारने के अलावा कोई चारा नहीं था. ठंड इतनी कि ज्यादातर लोग घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाये. यही कारण रहा कि हाइवे, चौक-चौराहों और बाजारों में रविवार को भी सन्नाटा पसरा रहा. दुकानें खुली रही, लेकिन ग्राहक नदारद रहे. जगह-जगह दुकानदार अलाव के पास बैठकर ठंड से बचाव करने की कोशिश करते दिखे. शाम छह बजे ही शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसर गया. काफी सारे दुकानदार शटर गिराकर अपने-अपने घर चले गये. इक्के-दुक्के दुकान ही दुकान खोले रखे. सबसे बड़ी समस्या लोगों को कपड़े सुखाने में हो रही है.
सर्द पछुआ हवा हड्डी गलाने को बेताब है. जिला कृषि विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार को भी शनिवार की तरह ही जिले का औसत न्यूनतम तापमान 10 व अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किये गये. यानी लगातार तीसरे दिन कोर्ड डे की स्थिति रही. जोखिम वाली इस ठंड से फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है. केंद्र के मौसम विशेषज्ञ राकेश कुमार ने बताया कि अगले सप्ताह तक जिले में ठंड का प्रकोप काफी रहने की संभावना है. कड़ाके की ठंड रहने के कारण जनजीवन के साथ-साथ पशु पक्षियों भी प्रभावित होंगे.
— इस ठंड में दुधारू व आम पशुओं की ऐसे करें देखभाल
पशु वैज्ञानिक डॉ किंकर कुमार ने बताया कि यह मौसम दूध उत्पादन के लिए काफी अच्छा होता है. लेकिन पशुपालक को पशु प्रबंधन की जानकारी नहीं होने के कारण नुकसान हो जाता है. ऐसे में पशुपालक कुछ उपाय अपनाकर अच्छे दूध उत्पादन के साथ ही पशुओं को ठंड से बचा सकते है. बताया कि ठंड से पशुओं के बचाव के लिए रात के समय पशुओं को घर के अंदर बांध के रखें. पशुशाला के दरवाजे व खिड़कियों को जुट के बोरे से ढककर रखें. पशुशाला से लगातार गोबर व मूत्र की निकासी करें. पशुओं को ताजा या गुनगुना पानी ही पिलायें तथा शाम होते ही पशुओं से थोड़ी दूर पर अलाव की व्यवस्था करें. दुधारू पशुओं को तेल एवं गुड़ देने से भी शरीर का तापमान समान बनाये रखने में सहायता मिलती है. ऐसे समय में पशुओ को बाहर चरने के लिए न जाने दें. दूध उत्पादन बनाये रखने के लिए पशुओं को एक किग्रा अतिरिक्त दाना का मिश्रण दें, ताकि पशुओं को अतिरिक्त ऊर्जा मिल सके. वहीं, खनिज लवण कॉन्सिमिन या मिनफागोल्ड प्रति पशु 50 ग्राम दें. ठंड में पशुओं को खुरपका मुंहपका रोग होने की आशंका बनी रहती है. ऐसे में पशुपालक पशुओं को टीका लगवाएं. जाड़े में पशुओ के थनों में दरार पड़ने की आशंका बनी रहती है. बचाव के लिए दुधारू पशुओं को दूहने के बाद वेसलीन का प्रयोग करें.
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