Sitamarhi Rural Road: सरकार भले ही ग्रामीण इलाकों में विकास की गंगा बहाने और हर गांव को पक्की सड़क से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी इन दावों को मुंह चिढ़ा रही है. नानपुर प्रखंड के अंतर्गत बिरार पंचायत का वार्ड नंबर 9 इसका जीता-जागता उदाहरण है. इस महादलित व पिछड़े वर्ग की करीब 50 घरों की बस्ती में आज तक एक पक्की सड़क तक नसीब नहीं हो सकी है, जिसके कारण पूरा गांव बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है.
बरसात में टापू बन जाता है गांव, कीचड़ के बीच जीने को मजबूर ग्रामीण
गांव तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों के पास सिर्फ एक कच्ची पगडंडी ही एकमात्र सहारा है. वर्तमान में जारी मानसून की बरसात ने इस रास्ते को पूरी तरह कीचड़ और जलजमाव के तालाब में तब्दील कर दिया है. पैदल चलना तो दूर, इस रास्ते पर साइकिल या दोपहिया वाहन ले जाना भी मौत को दावत देने जैसा है.
ग्रामीणों ने बयां किया दर्द: गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना सबसे बड़ा जोखिम
स्थानीय ग्रामीण खेसारी राय, छोटेलाल साह, अनमोल महतो, रामलाल साह और जीमदार महतो ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि बरसात के दिनों में उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं. गांव में अचानक कोई बीमार हो जाए या किसी गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना हो, तो उन्हें खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जो बेहद जोखिम भरा है. गांव में शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के समय बारातियों और सामान की गाड़ियों को लाने में भारी फजीहत झेलनी पड़ती है. किसानों ने तो सड़क निर्माण की खातिर अपने खेतों से जमीन भी दान दे दी, लेकिन इसके बावजूद आज तक सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो सका.
जनप्रतिनिधि और प्रशासन के दावे
मुखिया का पक्ष: बिरार पंचायत की मुखिया साहिना प्रवीन ने बताया कि कुछ भूखंडों पर आपसी सहमति न बनने और एक पक्ष द्वारा जमीन न दिए जाने के कारण सड़क का कार्य अटका हुआ था. अब जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कराकर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा.
प्रशासन का आश्वासन: नानपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) देवेंद्र कुमार ने बताया कि यह गंभीर मामला अब उनके संज्ञान में आया है. ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए जल्द ही संबंधित विभाग को निर्देशित कर सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा.
