फूलों की खेती से बदल सकती है किस्मत, जानिए कैसे सीतामढ़ी का बैरहा गांव बन गया 'मिनी कोलकाता'

सीतामढ़ी जिले का बैरहा गांव अब 'मिनी कोलकाता' कहलाता है. पारंपरिक खेती की घटती आय के बीच, किसानों ने गेंदा और रजनीगंधा जैसी फूलों की व्यावसायिक खेती अपनाकर अपनी किस्मत बदल ली है.

Sitamarhi Farmer Story: पारंपरिक फसलों की घटती आय और मौसम की अनिश्चितता के बीच सीतामढ़ी जिले के बथनाहा प्रखंड अंतर्गत बैरहा (बैरहा बराही) पंचायत ने आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश की है. आज यह पंचायत फूलों की व्यावसायिक खेती की बदौलत पूरे जिले में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी है. गांव के अधिकांश किसान बड़े पैमाने पर गेंदा, रजनीगंधा और अन्य फूलों की खेती कर रहे हैं. फूलों के इस भारी उत्पादन और बाजार में मजबूत हिस्सेदारी के कारण अब स्थानीय स्तर पर बैरहा गांव को लोग प्यार से ‘मिनी कोलकाता’ के नाम से पुकारने लगे हैं.

सरेह में लहलहा रहे फूल, दूसरे राज्यों तक हो रही आपूर्ति

प्रभात खबर की टीम जब बैरहा गांव के सरेह में पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद खूबसूरत दिखा. खेतों में जहां तक नजर जाती है, वहां पीले और नारंगी गेंदे के फूल लहलहा रहे हैं. खेतों में गेंदा की तुड़ाई कर रही सीमा कुमारी और परवल की फसल संवार रहे मोहन महतो समेत कई किसानों ने बताया कि गेंदा, रजनीगंधा, चेरी और चीना जैसे फूलों की खेती ने पूरे गांव को आर्थिक संबल दिया है. यहां तैयार फूलों की आपूर्ति केवल सीतामढ़ी जिला मुख्यालय में ही नहीं, बल्कि बिहार के कई अन्य जिलों और पड़ोसी राज्यों की मंडियों तक नियमित रूप से की जाती है.

प्रति बीघा दो लाख तक शुद्ध आमदनी, पर लागत भी भारी

किसानों का कहना है कि पुष्प और सब्जी की खेती में बाजार भाव का उतार-चढ़ाव लगातार बना रहता है. त्योहारों और लग्न के मौसम में अच्छी कमाई हो जाती है, जबकि सामान्य दिनों में कम दाम मिलने पर भी लगातार मेहनत करनी पड़ती है. किसानों के अनुसार, एक बीघा खेत में गेंदा की खेती करने पर सालाना औसतन करीब दो लाख रुपये तक की शुद्ध आमदनी प्राप्त हो जाती है. हालांकि, कीटनाशक दवा, नियमित सिंचाई, खाद और दैनिक मजदूरी पर अच्छी-खासी पूंजी भी लगानी पड़ती है.

गांव के ब्रह्मदेव सिंह, कपिलेश्वर सिंह, भोला सिंह, रामनदी सिंह, भिखारी सिंह, देवनारायण सिंह, सुनील सिंह, उमेश सिंह, नथुनी सिंह, दीपक कुमार, हरिशंकर कुमार, भदई महतो, पुकार महतो, रामबालक महतो, जबल महतो, राममिलन महतो, गोकुल महतो, कौशल सिंह, दरोग सिंह, रामसूरत दास, रजनीश रावत, सकल राय, नंदलाल ठाकुर व ललन ठाकुर समेत बड़ी संख्या में किसान इस काम से जुड़े हैं.

कोल्ड स्टोरेज और फसल सुरक्षा मिले तो बनेगा बड़ा हब

स्थानीय पैक्स अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने बताया कि बैरहा के मेहनतकश किसानों ने अपनी लगन से पुष्प कृषि को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है. उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि यदि क्षेत्र में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज, सुलभ विपणन (मार्केटिंग) और फसल सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था उपलब्ध करा दी जाए, तो यह पूरा इलाका उत्तर बिहार में पुष्प उत्पादन का सबसे बड़ा हब बनकर उभर सकता है. फूल जल्दी खराब होने वाली उपज हैं, इसलिए स्टोरेज की कमी से किसानों को कभी-कभी औने-पौने दाम पर फसल बेचनी पड़ती है.

बॉक्स: पढ़ाई के साथ खेतों में पसीना बहा रहीं सीमा कुमारी

गांव के किसान ब्रह्मदेव सिंह की पुत्री सीमा कुमारी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. इंटरमीडिएट उत्तीर्ण सीमा आगे की उच्च शिक्षा जारी रखने के साथ-साथ प्रतिदिन खेतों में उतरकर परिवार का हाथ बंटाती हैं. सीमा का कहना है कि खेती केवल पुरुषों का क्षेत्र नहीं है; सही दिशा, मेहनत और आधुनिक सोच से खेती को एक बेहद मुनाफे वाले कारोबार में बदला जा सकता है. उनके अनुसार फूलों की महक ने उनके गांव की पूरी माली हालत बदल दी है.


ये भी पढ़ें: पोलियो ने रोका पढ़ाई का रास्ता, साहित्य ने दी नई पहचान, दीपनारायण सिंह को मिला सम्मान

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By रतिकांत झा

रतिकांत पिछले करीब 17 वर्षों से पत्रकारिता में निरंतर कार्यरत हैं. उन्हें राजनीति, धर्म-अध्यात्म, पर्व-त्योहार, अपराध, सामाजिक सरोकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं जैसे बहुआयामी विषयों पर लगातार सटीक रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव प्राप्त है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >