मौलापुर में प्रशासनिक संकट को लेकर फूटा गुस्सा, लोगों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह का पुतला फूंका

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित मौलापुर नगरपालिका गंभीर प्रशासनिक संकट से जूझ रही है। प्रमुख प्रशासकीय अधिकारी का पद खाली होने के कारण विकास कार्य ठप हैं और कर्मचारियों-शिक्षकों का वेतन भी नहीं मिल रहा है।

Maulapur Administrative Crisis:  सीतामढ़ी जिला से भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के रौतहट जिला अंतर्गत मौलापुर नगरपालिका में इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट गहरा गया है. नगरपालिका में प्रमुख प्रशासकीय अधिकारी का पद लंबे समय से रिक्त रहने के कारण स्थानीय विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं. इस प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोशित स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मौलानगर में देश के प्रधानमंत्री वालेंद्र शाह उर्फ बालेन शाह का पुतला दहन कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर मौलापुर नगरपालिका के साथ सौतेला व्यवहार करने और विकास विरोधी नीति अपनाने का आरोप लगाया है.

बजट फ्रीज होने से रुका विकास, कर्मचारियों और शिक्षकों का वेतन ठप

प्रदर्शनकारियों का गंभीर आरोप है कि प्रमुख प्रशासकीय अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण नगरपालिका का बजट क्रियान्वयन पूरी तरह ठप हो गया है. बजट फ्रीज होने से न केवल नए विकास कार्य बाधित हो रहे हैं. बल्कि पिछले कई महीनों से नगर निगम के कर्मचारियों और विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों का वेतन भुगतान भी पूरी तरह बंद है. इसके अलावा आम जनता से जुड़ी बुनियादी सेवाएं जैसे सामाजिक सुरक्षा भत्ता. बहुक्षेत्रीय पोषण कार्यक्रम और पूरे शहर की सफाई व्यवस्था भी इस प्रशासनिक गतिरोध के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रही है. जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है.

अधिकारी के तबादले और मंत्रालय के फैसले से बढ़ा विवाद, नगर प्रमुख ने साधा निशाना

आंदोलनकारियों का कहना है कि संघीय मामला तथा सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने तत्कालीन अधिकारी के तबादले के बाद सुरेशबाबू धिमिरे को नया प्रशासकीय अधिकारी नियुक्त किया था. लेकिन राजनीतिक उठापटक के कारण उनके योगदान देने से ठीक पहले ही मंत्रालय ने उन्हें वापस बुला लिया. जिसके बाद से यह महत्वपूर्ण पद खाली पड़ा है. मामले पर मौलापुर नगरपालिका की नगर प्रमुख रीना कुमारी साह ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सरकार पर अधिकारी की पदस्थापना में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाते हुए इसे एक बड़ा प्रशासनिक संकट बताया और जल्द से जल्द अधिकारी की नियुक्ति करने की मांग की है.


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राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

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