Choraut Water Crisis: चोरौत प्रखंड क्षेत्र में लगातार गहराते पेयजल संकट के बीच प्रशासन और पीएचईडी (PHED) विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं. सरकारी स्तर पर जलापूर्ति बहाल न होने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है. इस बीच स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अपने स्तर पर पहल करते हुए प्रभावित इलाकों में टैंकर से पानी पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की है.
पीएचईडी की अधूरी योजनाएं बनीं मुसीबत
ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचईडी विभाग की लापरवाही के कारण यह संकट पैदा हुआ है:
- महीनों पहले समरसेबल गाड़ने और पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू किया गया, जो आज तक अधूरा पड़ा है.
- नई जलापूर्ति योजना शुरू न होने से लोग भीषण गर्मी में पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं.
- पूर्व से संचालित नल-जल योजनाएं भी रखरखाव के अभाव में बदहाल हो चुकी हैं.
- कई जगहों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हैं, जबकि खराब पड़े मोटर और स्टार्टर की मरम्मत नहीं कराई जा रही है.
जनप्रतिनिधियों ने निजी स्तर पर शुरू कराई राहत
जनप्रतिनिधियों ने मोर्चा संभालते हुए ग्रामीणों को राहत देना शुरू किया है:
- प्रमुख प्रतिनिधि सुनील राउत, मुखिया प्रमोद हाथी और पंसस दिलीप मंडल ने निजी स्तर पर टैंकरों के जरिए पेयजल पहुंचाना शुरू किया है.
- जनप्रतिनिधियों का कहना है कि विभागीय उदासीनता का खामियाजा बेकसूर आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.
शीघ्र समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों व मोटरों की तत्काल मरम्मत कराकर जलापूर्ति बहाल करने की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकला, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
