68 वसंत के बाद भी मयूरवा गांव में अंधेरा

68 वसंत के बाद भी मयूरवा गांव में अंधेरा तत्कालीन विधायक मो. अनवारुल हक के कार्यकाल में लगा था गांव में पोल सीतामढ़ी. सोनबरसा प्रखंड के मयूरवा गांव के लोगों को आज तक बिजली सुविधा नसीब नहीं हो सका है. कहने के लिए तो आजादी के 68 वसंत पार हो गये, पर उस गांव के […]

68 वसंत के बाद भी मयूरवा गांव में अंधेरा तत्कालीन विधायक मो. अनवारुल हक के कार्यकाल में लगा था गांव में पोल सीतामढ़ी. सोनबरसा प्रखंड के मयूरवा गांव के लोगों को आज तक बिजली सुविधा नसीब नहीं हो सका है. कहने के लिए तो आजादी के 68 वसंत पार हो गये, पर उस गांव के लोगों का कहना है कि बिजली आने के बाद ही वे मानेंगे कि वे आजाद भारत में रह रहे हैं. लोगों को इस बात का मलाल है कि गांव के चारों ओर के गांवों में बिजली से बल्ब जलते हैं और उनके गांव में यह सुविधा एक सपना बना हुआ है. काश! मिली रहती बिजली सुविधा सोनबरसा से वर्षों पूर्व मो. अनवारुल हक विधायक बने थे. बाद के चुनाव में वे हार गये. उस दौरान भले ही लोगों ने उनकी मदद नहीं की, पर आज लोगों को मलाल है कि काश! मो अनवारुल हक दूसरी बार भी चुनाव जीत जाते तो आज मयूरवा गांव बिजली सुविधा के लिए नहीं तरसता. मो. हक ने अपने कार्यकाल में मयूरवा गांव में बिजली का पोल व तार लगवाया था. बिजली की आपूर्ति के लिए कोशिश कर रहे थे. इसी बीच, उनका कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही चुनाव भी हार गये. तब से अब तक कई जनप्रतिनिधि चुनाव जीते, पर किसी के स्तर से वह ठोस पहल नहीं की गयी ताकि अन्य गांवों की तरह मयूरवा गांव के लोगों को भी बिजली सुविधा मिल सके. जर्जर हो गये पोल व तार ग्रामीण राधाकृष्ण सिंह कहते हैं कि बिजली की आपूर्ति के अभाव में पोल व तार जर्जर हो गये हैं. कई पोल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गये हैं. अब नया पोल व तार लगाये बिना बिजली की आपूर्ति संभव नहीं हैं. कहते हैं कि सीएम नीतीश कुमार का वह दावा विफल हो गया, जिसमें कहा गया था कि वह दिन दूर नहीं जब सभी गांवों में बिजली सुविधा उपलब्ध करा दी जायेगी. गांव के युवा कहने लगे हैं कि ‘ अपना गांव संभालों मैं तो शहर की ओर चला. श्री सिंह की माने तो मयूरवा के बगल के गांवों बसतपुर, रजवाड़ा, रोहुआ, कचहरीपुर व अन्य गांवों में बिजली की सुविधा है. उनके गांव से पूरब पूर्व मंत्री सह राजद के प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. रामचंद्र पूर्वे का गांव बंदरझूला है.

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