जिंदा थे तो कार्रवाई नहीं और मर गये तो...

जिंदा थे तो कार्रवाई नहीं और मर गये तो… मृत प्रधान शिक्षक के खिलाफ प्राथमिकी का आदेश स्कूल भवन मद की राशि के गबन का आरोप बोखड़ा. प्रखंड के मध्य विद्यालय, कुरहर के प्रधान शिक्षक अरुण कुमार जब तक जिंदा थे, तब तक विभाग सरकारी राशि के गबन की बाबत उन से कोई पूछताछ नहीं […]

जिंदा थे तो कार्रवाई नहीं और मर गये तो… मृत प्रधान शिक्षक के खिलाफ प्राथमिकी का आदेश स्कूल भवन मद की राशि के गबन का आरोप बोखड़ा. प्रखंड के मध्य विद्यालय, कुरहर के प्रधान शिक्षक अरुण कुमार जब तक जिंदा थे, तब तक विभाग सरकारी राशि के गबन की बाबत उन से कोई पूछताछ नहीं की और न कोई कार्रवाई का निर्णय लिया. उनकी मृत्यु हो जाने के बाद अब विभाग ने बीइओ को उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया है. हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि उक्त आदेश कुछ अजीब है. भला मृतक पर प्राथमिकी कर देने से भी क्या राशि की रिकवरी हो पाएगी. बहरहाल, उक्त आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है. क्या है पूरा मामला वर्ष 2006-07 में मध्य विद्यालय कुरहर के भवन के निर्माण के लिए 4.87 लाख प्राक्कलित राशि थी, जिसमें से तीन लाख अग्रिम के रूप में दिया गया था. इसी तरह शेड के निर्माण के लिए 1.20 लाख में से 1.8 लाख रुपये दिया गया था. भवन के नाम पर धरातल पर कुछ नहीं किया गया. करीब छह वर्ष पूर्व शिक्षक अरुण कुमार चल बसे. जब तक जिंदा रहे, विभाग खामोश रहा. उनकी मृत्यु के छह वर्ष बाद तक विभाग चुपचाप ही था. यह संयोग रहा कि शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान इस पर डीएम राजीव रौशन की नजर गयी और उन्होंने कार्रवाई करने का आदेश दिया. बता दें कि अरुण कुमार की विधवा लीलावती देवी पुपरी प्रखंड में ही शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं. घर पुपरी प्रखंड के केशोपुर पूरा गांव में है. क्या कहते हैं अधिकारी बीआरसीसी शिवशंकर पंडित ने बताया कि यह मामला पेचीदा है. बीइओ रामवृक्ष सिंह ने बताया कि मृतक पर प्राथमिकी कैसे संभव होगी. मृतक के आश्रित पर प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए. वे इसके लिए वरीय अधिकारी से मार्गदर्शन मागेंगे.

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