मधुश्रावणी में बाग-बगीचे व मंदिर हो जाते हैं मनमोहक

समृद्ध परंपरा पायल की झंकार व मैथिली गीतों को सुनने को उत्सुक रहते हैं लोग सीतामढ़ी : जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मिथिलांचल के प्रसिद्ध पर्व मधुश्रावणी के शुरू होते ही घर की आंगन, बाग-बगीचा, खेत-खलिहानों के साथ मंदिर परिसर भी पायल की झंकार व मैथिली गीतों के स्वर से मनमोहक हो उठा है. नागपंचमी […]

समृद्ध परंपरा
पायल की झंकार व मैथिली गीतों को सुनने को उत्सुक रहते हैं लोग
सीतामढ़ी : जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मिथिलांचल के प्रसिद्ध पर्व मधुश्रावणी के शुरू होते ही घर की आंगन, बाग-बगीचा, खेत-खलिहानों के साथ मंदिर परिसर भी पायल की झंकार व मैथिली गीतों के स्वर से मनमोहक हो उठा है.
नागपंचमी के दिन से शुरू होने वाले इस पर्व को नवविवाहिताएं अपने की लंबी उम्र के लिए मनाती है. इस दौरान ये नवविवाहिताएं नये-नये परिधानों में सोलहों शृंगार कर शाम के समय जब अपनी सखियों के साथ मैथिली गीत गाते फूल-पत्ती चुनने निकलती है तब यह दृश्य देखते बनता है. इनकी गीत को सुन कर लोग एक झलक पाने को उत्सुक हो जाते हैं.
सावन की रिमझिम फुहार के बीच इन नवविवाहिताओं द्वारा फूल-पत्ती चुनने का अंदाज भी अलग होता है. बताया जाता है कि इनके द्वारा चुने गये फूल से अगले दिन सुबह विषहरी, नाग-नागिन व मां गौरी की विशेष पूजा की जाती है. इस पर्व को नव दंपत्तियों के लिए मधुमास भी कहा जाता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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