शेखपुरा जिले के घाटकोसुम्भा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल में घोर लापरवाही बरती जा रही है. स्वास्थ्य केंद्र से निकलने वाले मेडिकल कचरे को घाटकोसुम्भा में टाटी नदी के किनारे डंप किया जा रहा है, जिससे इलाके में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है.
इस संबंध में ग्रामीणों का कहना है कि इस घोर लापरवाही के कारण कई लोग संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं. यह बेहद गंभीर मामला है, जिस पर लगातार अनदेखी की जा रही है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले में नदी के किनारे यह कचरा फेंके जाने के कारण बाढ़ के दौरान यह पानी में बह जाएगा. इस नदी के पानी का उपयोग बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों द्वारा किया जाता है.
संक्रमण और गंभीर बीमारियों का बना खतरा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की गई सुई, सिरिंज और खून से सनी पट्टियां खुले स्थान पर फेंक दी जा रही हैं, जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं.
कचरा खुले में पड़े रहने के कारण वहां पशु-पक्षी और मवेशी पहुंच रहे हैं, साथ ही बच्चों के पहुंचने से संक्रमण फैलने का जोखिम बना हुआ है.
वहीं, बाढ़ के दौरान इस कचरे के आसपास के खेतों में फैलने के साथ-साथ टाटी एवं हरोहर नदी के जल स्रोतों में मिलने की आशंका है, जिससे आसपास के ग्रामीणों को बड़ा नुकसान हो सकता है.
जानकारों के अनुसार, इस प्रकार के मेडिकल वेस्टेज के संपर्क में आने से हेपेटाइटिस बी, सी और एचआईवी जैसे गंभीर संक्रमणों का खतरा हो सकता है.
मॉनिटरिंग के अभाव में नियमों की अनदेखी
अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा ठेके पर विभिन्न संस्थानों को दी जाती है.
हालांकि, इसकी सही तरीके से मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण पैसे बचाने के उद्देश्य से खुले में मेडिकल कचरा फेंका जा रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि वे पहले भी इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद मनमानी का दौर जारी है.
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