बारिश की कमी से सूखे पड़े शेखपुरा के नदी-नाले, धान की रोपनी महज 22.24 प्रतिशत

शेखपुरा जिले में जुलाई महीना समाप्त होने को है, लेकिन बारिश की कमी ने धान की खेती पर सूखे का खतरा मंडरा रहा है. अधिकांश नदी-नाले सूखे पड़े हैं, जिससे धान की रोपनी का लक्ष्य सिर्फ 22.24% ही पूरा हो पाया है. किसान अब पूरी तरह से ईश्वर भरोसे हैं.

Sheikhpura News : जुलाई महीना समाप्ति पर है, लेकिन शेखपुरा जिले में बारिश की भारी कमी के कारण अधिकांश नदी-नाले सूखे पड़े हैं. जिससे धान फसल की रोपनी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है. कृषि विभाग के आंकड़े के अनुसार, जिले में 28,330.70 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान फसल की रोपनी का लक्ष्य निर्धारित है.

इसमें अब तक 6,299.60 हेक्टेयर में धान की रोपनी हो चुकी है, जो कि महज 22.24 प्रतिशत है. बारिश नहीं होने से धान की खेती पर इस बार सुखाड़ की आशंका मंडरा रही है. खेतों में पानी नहीं है, जिसके कारण किसान धान की रोपनी नहीं कर पा रहे हैं.

धान की रोपनी वैसे ही गिने-चुने इक्के-दुक्के किसान कर पा रहे हैं, जिनके पास बोरिंग पंप की खुद की व्यवस्था है. अधिकांश किसान भगवान के भरोसे हैं, कि आगे बारिश होती है तो धान फसल की रोपनी हो पाएगी या खेत यूं ही खाली पड़े रह जाएंगे.

इस संबंध में किसान धर्मेन्द्र महतो ने बताया कि आषाढ़ माह खत्म होने को है, अब सावन का महीना शुरू होने वाला है. इस समय अधिकांश नदी-नाले पानी से भरे पड़े रहते थे, लेकिन इस बार मानसून ने दगा दे दिया है, जिससे किसान हताश और निराश हैं.

इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि जिले में 28,330 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपनी का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन बारिश की कमी के कारण धान की रोपनी की गति बेहद धीमी है और अब तक मात्र 22.24 प्रतिशत ही धान की फसल की रोपनी हुई है. उन्होंने कहा कि बारिश होने से इसमें तेज गति आने की संभावना है.

सूखे पड़े हैं नदी-नाले, भगवान भरोसे बैठे हैं किसान

बारिश के मौसम में इस बार 27 जुलाई तक का समय बीत जाने के बाद भी जिले के प्रमुख नदी, आहर और पईन सूखे पड़े हैं. बरसात के दिनों में लबालब भरा रहने वाला कौड़िहारी, रतोइया, सामे, हरोहर और टाटी नदी इस बार सूखे पड़े हैं, जिससे किसानों का कोई बस नहीं चल रहा है और किसान पूरी तरह से भगवान भरोसे हैं.

किसान इंद्रदेव से बारिश की गुजारिश कर रहे हैं. पैन गांव के किसान धर्मेन्द्र महतो और सुनील महतो ने बताया कि आमतौर पर मानसून ठीक होने पर धान की फसल की रोपाई का कार्य काफी तेज होता था.

भीषण गर्मी की मार ने भी किसानों को किया परेशान

इस बार भीषण गर्मी के कारण जुलाई का महीना जिलावासियों के लिए बेहद परेशानी भरा रहा. तापमान में भारी वृद्धि के कारण किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी.

भू-जल स्तर में भारी गिरावट के कारण लोग पंप सेटिंग के जरिए धान के बिचड़े खेतों में डालने में पिछड़ गए. कुछ किसान किसी तरह भीषण गर्मी में भी धान के बिचडों को बचा पाने में सफल रहे.

जुलाई के पहले सप्ताह थोड़ी बारिश से किसानों को धान की फसल मौसम के अनुकूल लग रही थी, लेकिन इधर एक सप्ताह से जिले में बारिश नहीं होने और खेतों में पानी न होने के कारण धान की रोपनी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है.

Also Read : सीएम सम्राट चौधरी ने नालंदा डेयरी को दी 26 करोड़ की सौगात, दही-लस्सी प्लांट समेत कई योजनाओं का किया शिलान्यास


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Satyendra Kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >