Sheikhpura Anganwadi Center Shifting News (सत्येन्द्र कुमार): शेखपुरा जिले से इस वक्त बाल विकास और समाज कल्याण योजनाओं को लेकर एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण प्रशासनिक खबर सामने आ रही है. शेखपुरा के जिलाधिकारी (DM) शेखर आनंद की अध्यक्षता में समाहरणालय सभाकक्ष में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर एक विस्तृत और हाई-लेवल समीक्षा बैठक की गई. इस बैठक में डीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिले के भीतर किराये के भवनों (गैर-सरकारी) में चल रहे 363 आंगनबाड़ी केंद्रों को यथाशीघ्र उनके निकटतम सरकारी विद्यालयों में स्थानांतरित (शिफ्ट) करने का सख्त निर्देश दिया है. इसके साथ ही सरकारी कार्यों में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों और महिला पर्यवेक्षिकाओं को सीधे तौर पर सस्पेंड और विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
जिले के 718 आंगनबाड़ी केंद्रों की हुई गहन समीक्षा, नाबार्ड और मनरेगा भवनों के लिए समय सीमा तय
जिला प्रशासन और आईसीडीएस (ICDS) कार्यालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिले में बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर को सुधारने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है. समीक्षा के दौरान पाया गया कि जिले में कुल 718 स्वीकृत आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें से वर्तमान में केवल 207 केंद्र ही अपने निजी सरकारी भवनों में चल रहे हैं. जबकि 363 केंद्र निजी किराये के मकानों में और शेष अन्य विभिन्न सरकारी स्थलों व विद्यालयों में संचालित हो रहे हैं. डीएम शेखर आनंद ने मनरेगा और आईसीडीएस के कंवर्जेंस (अभिश्रवण) से तैयार हो रहे नए आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों का निर्माण कार्य हर हाल में आगामी 6 जुलाई 2026 तक पूरा कर विभाग को हैंडओवर करने का कड़ा आदेश जारी किया है. इसके अलावा 10 केंद्रों में पीने के साफ पानी और शौचालय निर्माण का जिम्मा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) को सौंपा गया है, जिसकी लाइव मॉनिटरिंग जिला प्रोग्राम पदाधिकारी करेंगी.
माइक्रो निरीक्षण में लापरवाही पड़ी तो खैर नहीं, पोषण ट्रैकर ऐप को लेकर सेविकाओं को आखिरी चेतावनी
डीएम ने बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और महिला पर्यवेक्षिकाएं (Supervisors) आईसीडीएस निदेशालय बिहार पटना द्वारा जारी नई मार्गदर्शिका के अनुसार अपने-अपने क्षेत्रों का माइक्रो निरीक्षण शत-प्रतिशत पूरा करें. जो भी पर्यवेक्षिका फील्ड में जाकर 100 प्रतिशत लाइव निरीक्षण की रिपोर्ट सबमिट नहीं करेगी, उसके खिलाफ सीधे दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही आंगनबाड़ी सेविकाओं को ‘पोषण ट्रैकर ऐप्लिकेशन’ पर बच्चों के वजन, हाजिरी और पोषण वितरण के सभी घटकों का डेटा रोजाना लाइव अपडेट करने का निर्देश दिया गया है. समय पर डेटा एंट्री न करने वाली सेविकाओं के खिलाफ मानदेय रोकने और चयनमुक्ति की कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
ईंट भट्ठों के अक्षर लर्निंग सेंटर पर रहेगी पैनी नजर, पेंशन धारकों का होगा डोर-टू-डोर जीवन प्रमाणीकरण
बैठक में जहां एक तरफ लापरवाह कर्मियों को डांट पड़ी, वहीं डीएम ने बेहतर कार्य करने वाली महिला पर्यवेक्षिकाओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं की सूची प्रखंड स्तर से प्राप्त कर उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित करने का भी निर्देश दिया. इसके अलावा जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन कार्यालय को निर्देश दिया गया कि वे जिले के विभिन्न ईंट भट्ठों पर प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए संचालित ‘अक्षर लर्निंग सेंटर’ का नियमित औचक निरीक्षण करें ताकि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो.
अंत में बुजुर्गों और दिव्यांगों को बड़ी राहत देते हुए डीएम शेखर आनंद ने सामाजिक सुरक्षा कोषांग के पदाधिकारियों को कड़ा टास्क सौंपा है. उन्होंने निर्देश दिया है कि अधिकारी अपने स्तर से गांवों में ‘डोर टू डोर कैंपेन’ (घर-घर अभियान) चलाकर बुजुर्गों का डिजिटल जीवन प्रमाणीकरण (Life Certification) सुनिश्चित कराएं. साथ ही वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन से जुड़े जितने भी आवेदन दफ्तरों में धूल फाँक रहे हैं, उन्हें आगामी 10 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से निष्पादित कर गरीबों के बैंक खातों में पेंशन की राशि भेजना लाइव शुरू करें. डीएम के इस कड़े और ताबड़तोड़ निर्देशों के बाद शेखपुरा ब्लॉक और समाज कल्याण विभाग के बाबुओं के बीच भारी हड़कंप देखा जा रहा है.
