Ghatkusumbha Flood-Affected : शेखपुरा के घाटकोसुम्भा प्रखंड को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राज मंडल का आमरण अनशन चौथे दिन भी जारी है. स्वास्थ्य में गिरावट के बीच डॉक्टरों की टीम जांच के लिए पहुंची, लेकिन अनशनकारी से मिलने कोई प्रशासनिक पदाधिकारी नहीं पहुंचा. अब इसी मांग को लेकर शुक्रवार को महिलाएं प्रखंड कार्यालय का घेराव करेंगी.
चौथे दिन भी जारी है पप्पू राज मंडल का आमरण अनशन
घाटकोसुम्भा प्रखंड मुख्यालय के पास सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू राज मंडल का आमरण अनशन चौथे दिन भी जारी है. उनकी मांग है कि घाटकोसुम्भा प्रखंड को जलजमाव क्षेत्र की जगह बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया जाए, ताकि प्रभावित लोगों को बाढ़ आपदा के तहत मिलने वाली सरकारी सहायता का लाभ मिल सके.
स्वास्थ्य में गिरावट का दावा, डॉक्टरों की टीम ने की जांच
आमरण अनशन के दौरान पप्पू राज मंडल के स्वास्थ्य में गिरावट आने की बात कही जा रही है. गुरुवार को डॉक्टरों की टीम स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंची. हालांकि, अनशन के समर्थन में मौजूद लोगों के अनुसार कोई प्रशासनिक पदाधिकारी पप्पू राज मंडल का हाल जानने नहीं पहुंचा.
बड़ी संख्या में लोग कर रहे अनशन का समर्थन
आमरण अनशन के समर्थन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद हैं. समर्थकों ने प्रशासन पर मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटकोसुम्भा प्रखंड की बड़ी आबादी इस समय बाढ़ और जलजमाव की समस्या से प्रभावित है.
खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद होने का दावा
स्थानीय लोगों के अनुसार बाढ़ और जलजमाव के कारण खेतों में लगी धान, मकई और अरहर की फसलें नष्ट हो गई हैं. क्षेत्र के लोगों की आय का प्रमुख साधन खेती है. ऐसे में फसल बर्बाद होने से प्रभावित परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहराने की बात कही जा रही है.
दो वक्त के भोजन का इंतजाम करना भी मुश्किल
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण कई लोग अपने घरों में रहने को मजबूर हैं. खेती प्रभावित होने के साथ रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हुए हैं. ऐसे में परिवार के सभी सदस्यों के लिए दो वक्त के भोजन का इंतजाम करना भी मुश्किल हो रहा है.
राहत के नाम पर प्लास्टिक शीट और पशु चारा
घाटकोसुम्भा प्रखंड के प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से प्लास्टिक शीट और पशु चारा उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है. वहीं, कई गांवों में पीने के लिए टैंकरों से पानी भेजा जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बावजूद उन्हें खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी राहत की जरूरत है.
सामुदायिक किचन शुरू नहीं होने की शिकायत
प्रभावित लोगों का कहना है कि बाढ़ राहत के तहत घाटकोसुम्भा प्रखंड में सामुदायिक किचन का संचालन नहीं किया जा रहा है. उनका आरोप है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन और अन्य जरूरी सहायता पर्याप्त रूप से नहीं मिल रही है. इससे मुश्किल हालात में रह रहे लोगों की परेशानी बढ़ गई है.
2008 में बदला गया था क्षेत्र का दर्जा
स्थानीय लोगों के अनुसार घाटकोसुम्भा प्रखंड पहले सरकारी रिकॉर्ड में बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के रूप में दर्ज था. उस समय बाढ़ आपदा के तहत क्षेत्र के लोगों को सरकारी सहायता मिलती थी. वर्ष 2008 में इसे बाढ़ग्रस्त क्षेत्र की जगह जलजमाव क्षेत्र घोषित कर दिया गया. इसके बाद से यहां के लोगों को बाढ़ आपदा के तहत मिलने वाली सहायता से वंचित होने की शिकायत है.
18 साल से बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दर्जा देने की मांग
स्थानीय लोग वर्ष 2008 से घाटकोसुम्भा को दोबारा बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग उठा रहे हैं. उनका कहना है कि क्षेत्र में हर साल बाढ़ और जलजमाव की समस्या से बड़ी आबादी प्रभावित होती है. इसके बावजूद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए मिलने वाली सुविधाओं और सहायता का लाभ उन्हें नहीं मिल पाता.
पड़ोसी लखीसराय के बड़हिया का दिया जा रहा उदाहरण
स्थानीय लोगों का कहना है कि हरोहर नदी के दूसरे छोर पर स्थित लखीसराय जिले के बड़हिया प्रखंड में बाढ़ प्रभावित लोगों को सरकारी सहायता दी जा रही है. वहां सामुदायिक किचन के संचालन सहित अन्य राहत सुविधाएं मिलने की बात भी कही जा रही है. घाटकोसुम्भा के लोग इसी आधार पर अपने क्षेत्र के प्रभावित परिवारों को भी बाढ़ राहत का लाभ देने की मांग कर रहे हैं.
कांग्रेस ने डीएम को सौंपा था ज्ञापन
घाटकोसुम्भा को जलजमाव क्षेत्र की जगह बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग को लेकर कांग्रेस की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जा चुका है. संगठन की ओर से मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी गई थी.
आज महिलाएं करेंगी प्रखंड कार्यालय का घेराव
इसी मांग को लेकर शुक्रवार को महिलाएं घाटकोसुम्भा प्रखंड कार्यालय का घेराव करेंगी. आंदोलन में शामिल महिलाएं प्रखंड को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दर्जा देने और प्रभावित लोगों को बाढ़ आपदा के तहत राहत देने की मांग उठाएंगी.
प्रशासन के रुख पर टिकी नजर
आमरण अनशन के चौथे दिन स्वास्थ्य जांच के बीच अब महिलाओं के प्रस्तावित घेराव को लेकर प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर है. स्थानीय लोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दर्जा देने और राहत सुविधाएं बढ़ाने की मांग पर प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं.
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