देशभक्ति व एकता का किया मिसाल कायम
बरबीघा/शेखपुरा : इसलाम को मानने वाले लोगों का प्रमुख त्योहारों में एक दस दिवसीय त्योेहार मुहर्रम के ताजिया जुलूस में युवाओं ने तिरंगे के साथ वंदे मातरम का नारा बुलंद किया. युवा शिक्षाविद मो शब्बीर उर्फ बंटी के नेतृत्व में आज सौहार्द और भाईचारे के बीच मुहर्रम का समापन हो गया . इस त्योहार को लेकर रात भर लोग तरह-तरह के करतब तलवारो,भालों और लाठियों से दिखाये़ पूरा बरबीघा ’या अली या हुसैन के नारे ” से गूंजता रहा.
सुबह से ही इस त्योाहार को सौहार्दपूर्ण समापन के लिए प्रशासन भी काफी चुस्त दिखें .इस बार के बरबीघा फैजाबाद ताजिया के जुलूस में सबसे बड़ी बात देखने को यह मिली कि जुलूस के साथ इसलामी झंडे के साथ-साथ तिरंगे झंडे भी लहराते दिखे. जो यह संदेश दे रहा था कि विपरीत परिस्थितियों में हम सभी धर्म के लोग अपने देश की खातिर जान कुरबान कर देंगे.
तिरंगे झंडे के बारे में मुसलिम समुदाय के लोग ने कहा कि हम अपने दुश्मनों को इसके माध्यम से यह पैगाम देना चाहते हैं कि हम सब भारतीय हैं और भारत के लिए उसी प्रकार अपने जान को कुरवान कर देंगे. इस त्योहार के संबंध में फैजाबाद के ईमाम हाफिज मोहम्मद तौसिफ ने बताया कि पर्व को वर्तमान समय में लोग जिस तरह से मनाते हैं वो विल्कुल गलत है इसकी इजाजत हमारा धर्म कतई नहीं देता है. आजकल लोग मुहर्रम के नाम पर नशा,नाच,गाने आदि करते हैं जो हमारे धर्म के द़ष्टिकोण से गुनाह है.
मुहर्रम के अवसर पर फैजाबाद, पुरानीशहर, महल्लामपर, सामाचक मुहल्ले के ताजिया अपने-अपने अखाडा और गाजे बाजे के साथ थाना, ब्लॉक, झंडाचौक,चंदुकुआ आदि होते गौशाला के निकट करबाला पहुंच कर पहलाम कर वापस लौट आये़ इस त्योहार में लोगों की भागीदारी पहले से बहुत कम हो गया है .
