कारोबारियों की परेशानी बढ़ी

अनदेखी. क्रशर संचालकों को नहीं मिल रहा एनओसी करीब 60 मिनी स्टोन क्रशर का संचालन है प्रभावित विभाग में अटके मामले ने बढ़ायी कारोबारियों की बाधित शेखपुरा : जिले में पत्थर उद्योग तो चालू हुआ लेकिन कारोबार में रफ्तार नहीं आने से कारोबारी मायूस है. खास कर छोटे कारोबारियों को विभागों की नीतियों का खामियाजा […]

अनदेखी. क्रशर संचालकों को नहीं मिल रहा एनओसी

करीब 60 मिनी स्टोन क्रशर का संचालन है प्रभावित
विभाग में अटके मामले ने बढ़ायी कारोबारियों की बाधित
शेखपुरा : जिले में पत्थर उद्योग तो चालू हुआ लेकिन कारोबार में रफ्तार नहीं आने से कारोबारी मायूस है. खास कर छोटे कारोबारियों को विभागों की नीतियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. पत्थर उद्योग में रोजगार और निर्माण के दृष्टिकोण से स्टोन क्रशर की भूमिका अहम है. जिले में पूर्व के समय में करीब ढाई सौ क्रशर हुआ करते थे, लेकिन फिलहाल 65 स्टोन क्रशरों को खनन अनुज्ञप्ति प्राप्त है.
जिले में पहाड़ों की बंदोबस्ती के बाद स्टोन कशर संचालकों में रोजगार की उम्मीद बढ़ी है. इसको लेकर करीब छह माह पर जिले भर के पांच दर्जन क्रशर संचालकों ने पर्यावरण स्वच्छता प्रमाणपत्र के लिए राशि जमा कर आवेदन की प्रक्रिया पूरी की गयी है ताकि क्रशरों का नियमों के मुताबिक संचालन हो सके. लेकिन बड़ी बात यह है कि इन क्रशर संचालकों को प्रदूषण स्वच्छता प्रमाण पत्र की आज तक कार्रवाई पूरी नहीं किया जा सका. आलम यह है कि लाखों रुपये की पंूजी लगाकर पत्थर व्यवसायी लंबे इंतजार के बाद अब दूसरे राज्य को पलायन करने की तैयारी में है.
क्या है प्रक्रिया :
स्टोन क्रशर के प्रदूषण स्वच्छता प्रमाण पत्र के लिए पटना स्थित विभागीय कार्यालय में राजस्व राशि के रूप में 09 हजार रुपये जमा कराने होते हैं. इसके बाद पटना अथवा बरौनी स्थित कार्यालय से ऑनलाइन आवेदन किया जाता है. इसके बाद मानकता के अनुसार स्थलीय जांच कर संबंधित अधिकारी विभाग के प्रतिवेदन सौंपते हैं. इन सारी प्रक्रिया के तहत तीन दर्जन से अधिक आवेदन कई माह से विभाग के दफ्तर में धूल फांक रहे हैं.
क्या हैं परेशानी :
स्टोन क्रशर के कारोबार के लिए सरकार की नई नीतियों में नया अनुज्ञप्ति निर्गत नहंी किया जा रहा है. पुराने लाइसेंस के धारक क्रशरों को ही प्रदूषण स्वच्छता का प्रमाण पत्र दिया जाना है. विभागीय शिथिलता का बैड इफेक्ट झेल रहे कई कारोबारियों ने बताया कि दोबारा इस कारोबार को खड़ा करने में कर्जदार तो बन गये लेकिन कारोबार पर ग्रहण लगे रहने से सूद भी चुकाना मुश्किल हो रहा है. ऐसी स्थिति में एक बार फिर कारोबारियों के समक्ष मुश्किलों की घड़ी सामने आन पड़ी है.
बड़े क्रशरों को मिली अनुमति :
जिले में प्रदूषण स्वच्छता प्रमाण पत्र के अभाव में जिला प्रशासन ने मिनी क्रशरों पर पूर्ण पाबंदी लगा रखी है. हालांकि जिले में सभी 65 में से 05 बड़े क्रशर प्लांट है. इन पांच में से दो एमजीसीपीएल और बीपीएल कंपनी को अनुमति प्राप्त है. इसके साथ ही नये नियमावली के मुताबिक पहाड़ी भूखंड में ही क्रशर का संचालन किया जा सकता है. इसके लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है.
क्या कहते हैं अधिकारी :
क्रशर प्रदूषण स्वच्छता का खनन विभाग से कोई कार्रवाई और नियंत्रण नहीं है. इसके बाद भी कोई शिकायत या आवेदन और नियंत्रण नहीं है. इसके बाद भी कोई शिकायत या आवेदन मिलेगी तो विभाग को पत्राचार किया जा सकता है.
मनोज कुमार मिश्रा, खनिज विकास अधिकारी

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