शेखपुरा : पहाड़ी की तलहटी के चारों ओर बसा शेखपुरा शहर के लिए पानी की जुगाड़ टेक्नोलॉजी प्रकृति के आगे घुटने टेक रहा है. जल स्तर में लगातार आ रही गिरावट के कारण फरवरी माह बीतते ही शहरी क्षेत्र के आठ जलापूर्ति नलकूपों में तीन फेल कर गया है. जल स्तर गिरने के इस भयावह स्थिति के पीछे प्रकृति का कहर कहना शायद उचित नहीं होगा.
इसके लिए कहीं न कहीं हम सभी जिम्मेदार हैं. शहर में अगर जलापूर्ति व्यवस्था ठीक-ठाक हो तो आबादी पानी का कद्र नहीं करती. बेवजह पीने योग्य पानी को बहाया जाता है. ऐसी स्थिति में आज जो परिस्थिति शेखपुरा शहर के बीच उत्पन्न होने जा रही है. वह निश्चित तौर पर व्यापक रूप धारण कर रहा है. दरअसल नगर पर्षद शेखपुरा में 27 वार्ड हैं. इन वार्डों में जलापूर्ति व्यवस्था बहाल करने के लिए तत्कालीन सांसद व वर्तमान बिहार सरकार के मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने पहल की थी. इस पहल के बाद शहर में 22 करोड़ की जलापूर्ति योजना को उतारा गया था.
लेकिन, इस योजना की गुणवत्ता पर भी कई बार सवाल खड़े किये गये. बहरहाल सवाल योजना की गुणवत्ता का नहीं है. लेकिन 2008 में निर्माण कार्य पूरा होने के 10 साल बाद ही 22 करोड़ की शहरी जलापूर्ति योजना अब दम तोड़ने लगा है. शहर को पानी की आपूर्ति दिलाने के लिए पीएचईडी ने अपने अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से शहरी क्षेत्र के भूगर्भ में जलस्तर की कमी होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से भी पानी की आपूर्ति का व्यवस्था बहाल की गयी थी. लेकिन, विभाग का यह व्यवस्था 10 साल के अंदर ही अपना दम तोड़ने लगा है.
शहर का आधा हिस्सा चपेट में
नगर पर्षद की आबादी लगभग 6.50 लाख है. इनके लिए जलापूर्ति के लिए 63.5 किलोमीटर पाइप लाइन बिछायी गयी है. शहर का मुरारपुर रोड स्थित जलापूर्ति पंप हाउस कई माह से फेल है. इसके बाद जमालपुर रोड एवं मंडल कारा के पीछे क्रियान्वित नयी जलापूर्ति योजना का पंप हाउस भी जल स्तर नीचे जाने के कारण फेल हो गया है. विडंबना यह है कि इन तीनों पंप हाउसों के फेल होने से शहर के बुधौली बाजार लालबाग, अहियापुर, कटरा बाजार, जमालपुर रोड, वीआईपी रोड, खांडपर भिट्ठापर आदि में पानी की सप्लाई बाधित है.
आमदनी एक करोड़, पानी पर सालाना खर्च सवा करोड़
हाल के दिनों में शहरी जलापूर्ति को व्यवस्थित करने के लिए जिला प्रशासन ने पीएचईडी से योजना को नगर पर्षद को हस्तांतरित कर दिया. लेकिन, आर्थिक तंगी के कारण नगर पर्षद जलापूर्ति योजना को कार्यान्वित करने में असमर्थ है. नगर पर्षद के सूत्रों के अनुसार, आंतरिक संसाधनों से सालाना एक करोड़ की आय होती है, जिसमें 80 लाख वेतन व अन्य काम में खर्च होते हैं. इसके बाद पर्षद के फंड में 20 लाख की राशि बचती है़ अब इससे सवा करोड़ की जल आपूर्ति योजना का काम कैसे होगा़
शहर में नियमित जलापूर्ति के लिए विभाग को स्थितियों से अवगत कराया गया है. इसके साथ ही जरूरी आवंटन की भी मांग की गयी है़ जल स्तर में गिरावट से परेशानियों के सामना करना पड़ रहा है.
सुनील कुमार, कार्यपालक अधिकारी, शेखपुरा
एक दिन 12 लाख गैलन पानी की सप्लाई का लक्ष्य : शहर की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए 2008 में 22 करोड़ योजना चलाने का लक्ष्य 2010 की संभावित आबादी के अनुसार तय किया गया था. इस योजना के तहत हर दिन 12 लाख गैलन पानी की आपूर्ति की जानी थी. शहर में चार टावर हैं. एक टावर की क्षमता डेढ़ लाख गैलन की है. यहां 135 लीटर प्रति व्यक्ति पानी की आवश्यकता निर्धारित है. हालांकि शहर में जलापूर्ति की रीढ़ कहे जाने वाले पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था में दो पंप हाउस संचालित हैं. इन दोनों पंप हाउसों की क्षमता मात्र दो लाख गैलन प्रतिदिन की है.
